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| चित्र -गूगल से साभार |
आधा कप
चाय और
आधा कप प्यार |
चुपके से
आज कोई
दे गया उधार |
सांकल को
बजा गयी
सन्नाटा तोड़ गई ,
यादों की
एक किरन
कमरे में छोड़ गई ,
मौन की
उँगलियों से
छू गया सितार |
सम्मोहन
आकर्षण
मोहक मुस्कान लिए ,
तैर गई
खुशबू सी
वो मगही पान लिए ,
लहरों ने
तोड़ दिया
अनछुआ कगार |
परछाई
छूने में
हम हारे या जीते ,
सूरज के
साथ जले
चांदनी कहाँ पीते ,
अनजाने में
मौसम
दे गया बहार |
वृन्दावन
होता मन
गोकुल के नाम हुआ ,
बोझिल
दिनचर्या में
एक सगुन काम हुआ ,
आना जी
आना फिर
वही शुक्रवार |
जीवन का
संघर्षों से
वैसे नाता है ,
कभी -कभी
लेकिन यह
प्रेमगीत गाता है ,
कभी यह
वसंत हुआ


















