एक भक्ति गीत -देवी गीत
जय माँ विंध्यवासिनी ,काली
अष्टभुजा महरानी |
गंगा मैया द्वार तुम्हारे
बहती हे कल्यानी |
पर्वत ,खोह ,नदी ,सागर में
तेरी ज्वाला जलती ,
ज्ञान ,मन्त्र या तंत्र नहीं
माँ सिर्फ़ भक्ति से मिलती ,
कालिदास बन गया
तुम्हारी महिमा से अज्ञानी |
तुम्ही हो मंशा, वैष्णो देवी
तुम्हीं हो मैहर वाली ,
सती ,भवानी ,दुर्गा माता
कलकत्ते की काली ,
कामरूप की कामख्या माँ
अष्टसिद्धि की दानी |
सीता ,लक्ष्मी ,पार्वती तुम
अन्नपूर्णा कहलाती ,
गीत, कला ,संगीत सुकोमल
ब्रह्माणी सिखलाती ,
जिस पर हुई तुम्हारी महिमा
परमहंस वह ज्ञानी |
शंख ,चक्र और गदा
शीश पर स्वर्णिम मुकुट सुहाए ,
चरण तुम्हारे चढ़ा भक्ति का
फूल नहीं मुरझाए ,
शैलसुता तुम विश्वस्वरूपा
मैया हो वरदानी |
कवि -जयकृष्ण राय तुषार

