![]() |
| चित्र -साभार गूगल |
एक गीत -चलो प्रिये ! गठरी ले फिर अपने गाँव चलें
चलो प्रिये !
गठरी ले
फिर अपने गाँव चलें |
कुछ
घोड़ागाड़ी से
कुछ नंगे पाँव चलें |
चिड़ियों के
नये -नये
जोड़े फिर आयेंगे ,
पेड़ पर
बबूलों के
घोंसले बनायेंगे ,
पत्थरदिल
शहरों से
पीपल की छाँव चलें |
गाय -बैल ,
पिंजरे के
तोते को खोलेंगे ,
छोटों को
स्नेह ,बड़ों
को प्रणाम बोलेंगे ,
कठवत में
धोयेंगे
दादी के पाँव चलें |
रिश्ते जो
टूट गये
फिर उनकों जोड़ेंगे ,
ठनक गये
खेतों की
मिटटी को फोड़ेंगे ,
घर के
मुंडेरों पर सुनें
काँव -काँव चलें |
आछी के
फूल जहाँ
मेहँदी के पात हरे ,
हँसती है
भोर-साँझ
माँग में सिन्दूर भरे ,
आम और
महुआ के
फूलों के ठाँव चलें |

