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Monday, 8 November 2021

एक ग़ज़ल-उसको तो बस वृन्दावन तक जाना है


चित्र साभार गूगल 

एक ग़ज़ल-सूरदास को वृन्दावन तक जाना है


फूल,तितलियाँ, खुशबू सिर्फ़ बहाना है

तुमसे ही हर मौसम का अफ़साना है


नींद टूटने पर चाहे जो मंज़र हो

आँखों को तो हर दिन ख्वाब सजाना है


भूख-प्यास सब भूले चिंता ईश्वर की 

सूरदास को वृन्दावन तक जाना है


जीवन का रंग बदले हर दिन मौसम सा

हर दिन इसमें रूठना और मनाना है


आसमान से सभी परिंदे लौट रहे

रहने को बस धरती एक ठिकाना है

कवि-जयकृष्ण राय तुषार



                             
चित्र साभार गूगल 



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