Friday, 20 March 2015

एक गीत -मौसम को प्यार हुआ

चित्र -गूगल से साभार 

एक गीत -मौसम को प्यार हुआ 
खेतों में 
धान जला 
गेहूं लाचार हुआ |
चकाचौंध -
शहरों से 
मौसम को प्यार हुआ |

हम करैल
मिटटी में 
कर्ज़ -सूद बोते हैं ,
ऋतुओं की 
इच्छा पर 
हँसते हैं रोते हैं ,
फागुन में 
ओले थे 
सावन अंगार हुआ |

कौओं की 
चोंच धंसी 
बैलों की खाल में ,
चुटकी भर 
खैनी हम 
दाब रहे गाल में ,
गाँव नहीं 
गाँव रहा 
अब तो बाज़ार हुआ |

सोने की 
चिड़िया कब 
पेड़ों पर गाती है ,
राजसभा 
परजा को 
सच कहाँ बताती है ,
मक़सद को 
भूल गया 
जो भी सरदार हुआ |
चित्र -गूगल से साभार 


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