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Sunday, 14 April 2019

एक प्रेम गीत -हरी घास मेड़ों की



चित्र -साभार गूगल 

एक प्रेमगीत -हरी घास मेड़ों की 

जूड़े में 
बेला फिर 
गूँथ रही शाम |
मौसम 
ने आज लिखा 
चिट्ठियाँ अनाम |

टहनी की 
कलियों ने 
पाँव छुए फूल के ,
हँसकर के  
गोड़ रंगे 
नाउन फिर धूल के ,
पिंजरे में 
एक सुआ 
कहे राम -राम |

महुआ के 
फूल चुए 
बीन रहा कोई ,
चुपके से 
अलबम को 
छीन रहा कोई ,
खिड़की से 
झाँक कोई 
कर गया प्रणाम |

आम के 
टिकोरे हैं 
कहीं छाँह पेड़ों की ,
पायल से
 बात करे 
हरी घास मेड़ों की ,
सोया है 
चाँद कोई  
लगा रहा बाम |
चित्र -साभार गूगल 

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