![]() |
| चित्र -गूगल से साभार |
एक गीत -
आकाशी गुब्बारों को
किसको चुनें
जातियों को या
रंग -बिरंगे नारों को |
आज़ादी
थक गयी उड़ाकर
आकाशी गुब्बारों को |
थक गयी उड़ाकर
आकाशी गुब्बारों को |
राजनीति में
जुमलेबाजी-
भाषण कुछ अय्यारी है ,
जुमलेबाजी-
भाषण कुछ अय्यारी है ,
लोकतंत्र में
कुछ परिवारों
की ही ठेकेदारी है ,
गंगाजल से
धोना होगा
संसद के गलियारों को |
धोना होगा
संसद के गलियारों को |
केवल -अपनी
भरे तिजोरी
जो भी आते -जाते है ,
अपने -अपने
धर्मग्रन्थ की
झूठी कसमें खाते हैं |
अंधी न्याय
व्यवस्था देती
न्याय कहाँ लाचारों को |
नक्सलवादी-
भ्रष्टाचारी
कुछ नेता अभिमानी हैं ,
कुछ भारत में
रहकर के भी
दिल से पाकिस्तानी हैं ,
गले लगाते
कलमकार ,
कुछ अभिनेता, गद्दारों को |
राष्ट्रधर्म -
ईमान हमारा
सदियों से ही खोया है ,
चीरा -टाँके
लगे हमेशा
संविधान भी रोया है ,
सब अपना
दायित्व भूलकर
याद रखे अधिकारों को |
आँख -कान
कुछ बन्द न रखना
इनकी -उनकी सुनियेगा ,
जिसका
अच्छा काम रहा हो
उसको प्रतिनिधि चुनियेगा ,
कद -काठी
सब नाप-जोख के
रखना चौकीदारों को |
आँख -कान
कुछ बन्द न रखना
इनकी -उनकी सुनियेगा ,
जिसका
अच्छा काम रहा हो
उसको प्रतिनिधि चुनियेगा ,
कद -काठी
सब नाप-जोख के
रखना चौकीदारों को |
![]() |
| चित्र -साभार गूगल |
![]() |
| चित्र -साभार गूगल |


