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Monday, 23 August 2021

एक देशगान-फिर शांति अचम्भित,विस्मित है

 


देशगान-फिर शांति अचंभित,विस्मित है


जागो भारत के

भरतपुत्र

सरहद पर कर दो शंखनाद ।

फिर शांति 

अचम्भित, विस्मित है

फिर मानवता के घर विषाद ।


हो गयी 

अहिंसा खण्ड-खण्ड

हे बामियान के बुद्ध देख,

स्त्री,बच्चों 

लाचारों से

अब कापुरुषों का युद्ध देख,

बन शुंग,शिवाजी

गोविन्द सिंह,रण में

दाहिर को करो याद ।


बीजिंग,लाहौर

कराची का फिर

आँख मिचौनी खेल शुरू,

घर में सोए

गद्दारों का

षणयंत्र शत्रु से मेल शुरू,

इस बार 

शत्रु का नाम मिटा

हो अंतरिक्ष तक सिंहनाद।


वीटो वाले

दुबके घर में

इनको पसंद कोलाहल है,

नेतृत्व बने

अब महाकाल

दुनिया विष उदधि हलाहल है,

असुरों पर

फेंकों अब त्रिशूल

ताण्डव हो डमरू का निनाद ।

कवि-जयकृष्ण राय तुषार

सभी चित्र साभार गूगल


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