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Wednesday, 24 February 2016

गंगा पर कुछ दोहे -कवि बुद्धिसेन शर्मा

वरिष्ठ हिंदी कवि बुद्धिसेन शर्मा 


माँ गंगा पर कवि -बुद्धिसेन शर्मा के कुछ दोहे 

सदा रही है विश्व में भारत -भूमि अनन्य 
गंगा ने आकर किया इसे और भी धन्य 

पल पल मिलता है मुझे माँ तेरा मकरंद 
मेरे चिन्तन में घुली गंगाजल की गंध 

मिटे सदा के वास्ते दुखी हृदय की पीर 
आप कभी आकर बसे गंगा माँ के तीर 

कर फैलाते घाट पर निर्धन औ धनवान 
जो माँगा सबको दिया आन-बान सम्मान 

गंगा माँ तो है अमर कवि भी समयातीत 
हम दोनों रह जायेंगे समय जायेगा बीत 

माँ सुरसरि के तीर पर पड़े हजारों लोग 
हर लेती है माँ सदा जैसा भी हो रोग 

गंगाजल जिनके लिए जीवन का पाथेय 
तीन लोक की संपदा उनके आगे हेय 

श्रृंगवेरपुर में लगा कवियों का दरबार 
बुद्धिसेन चन्दन घिसें टीका करें तुषार 

दिनांक 22-02-2016 को श्रृंगवेरपुर रामवन गमन का स्थान में एक कवि सम्मेलन हुआ जिसमे गंगा पर ही कविता पढ़ना था |आयोजन E.Z.C.C.KOLKATA का था |संचालन श्लेष गौतम का था |चित्र -गूगल और गुफ्तगू से साभार ]

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