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Saturday, 18 August 2012

एक प्रेम गीत -मैं तुझमें तू कहीं खो गयी

चित्र -गूगल से साभार 
एक प्रेमगीत -मैं तुझमें तू कहाँ खो गयी 

यह भी क्षण 
कितना सुन्दर है 
मैं तुझमें तू कहीं खो गयी |
इन्द्रधनुष 
की आभा से ही 
प्यासी धरती हरी हो गयी |

जीवन बहती नदी 
नाव तुम ,हम 
लहरें बन टकराते हैं ,
कुछ की किस्मत 
रेत भुरभुरी कुछ 
मोती भी पा जाते हैं ,
मेरी किस्मत 
बंजारन थी 
जहाँ पेड़ था वहीँ सो गयी |

तेरी इन 
अपलक आँखों में 
आगत दिन के कुछ सपने हैं ,
पांवों के छाले 
मुरझाये अब 
फूलों के दिन अपने हैं ,
मेरा मन 
कोरा कागज था 
उन पर तुम कुछ गीत बो गयी |
चित्र -गूगल से साभार 
[ सबसे ऊपर लगे चित्र को देखकर ही इस गीत को लिखने का भाव प्रकट हुआ |इधर कुछ दिनों से लिखना मुश्किल हो रहा है फिर भी कोशिश कर रहा हूँ |]

Saturday, 9 April 2011

एक प्रेम गीत -देखकर तुमको फिरोजी दिन हुए

चित्र -गूगल सर्च इंजन  से साभार 
देखकर तुमको फिरोजी  दिन हुए 

तुम्हें देखा 
भूल बैठा मैं 
काव्य के सारे सधे  उपमान |
ओ अपरिचित ! 
लिख रहा तुमको 
रूप का सबसे बड़ा प्रतिमान |

देख तुमको 
खिलखिलाते फूल 
जाग उठती शांत जल की झील ,
खिड़कियों को 
गन्ध कस्तूरी मिली 
जल उठी मन की बुझी कंदील ,
इन्द्रधनु सा 
रूप तेरा देखकर 
हो रहे पागल हिरन ,सीवान |


मौन  जंगल सज 
रहीं  संगीत संध्याएं  
खुले चिड़ियों के नये स्कूल,
कभी रक्खे थे 
किताबों में जिन्हें 
मोरपंखों को गये हम भूल ,
तू शरद की 
चाँदनी शीतल 
और हम दोपहर के दिनमान |


हाशिये  नीले ,हरे होने लगे 
लौट आये 
फिर कलम के दिन,
कल्पनाओं के 
गुलाबी पंख ओढ़े 
हम तुम्हें लिखने लगे पल -छिन 
हमें जाना था 
मगर हम रुक गये 
खोलकर बांधा हुआ  सामान |


देखकर तुमको 
फिरोजी दिन हुए 
हवा में उड़ता हरा रुमाल ,
फिर कहीं 
गुस्ताख भौरें ने छुआ 
फूल का बायां गुलाबी गाल ,
सज गए फिर 
मेज़ ,गुलदस्ते 
पी रहे  काफ़ी सुबह से लाँन |

चित्र -गूगल सर्च इंजन से साभार 

Friday, 4 March 2011

एक प्रेम गीत -फूलों से बात करें

चित्र -गूगल सर्च इंजन से साभार 
एक प्रेम गीत -फूलों से बात करें

चलो कहीं 
झील -ताल 
कूलों से बात करें |
हाथ में 
किताब लिए 
फूलों से बात करें |

तुम्हें देख 
स्वप्न उगेंगे 
पठार, टीलों में ,
बातों की 
गंध महक 
जायेगी मीलों में ,

आओ फिर 
टूटते 
उसूलों से बात करें |

जी भर 
बतियायेंगे 
आज नहीं रोकना ,
होंठ पर 
उँगलियाँ धर 
मुझे नहीं टोकना ,

आओ इस 
उपवन के 
झूलों से बात करें |

थक कर भी 
हाथों में हाथ 
लिए चलना ,
छोर  से 
रूमालों के  
आँख भले मलना ,

पावों में 
लिपटी इन 
धूलों से बात करें |

भौरों को
फूलों के 
चटख रंग भायेंगे ,
ये उदास 
पंछी भी 
तुम्हें देख गायेंगे |

छूट गये 
रस्तों 
स्कूलों से  बात करें |
चित्र -गूगल से साभार 


एक गीत -मोगरे का फूल जूड़े में

  चित्र साभार गूगल  एक गीत -मोगरे का फूल जूड़े में  मोगरे का फूल  जूड़े में  सजाती है.  नदी हँसकर  ज़िन्दगी का   गाती  है. धूप -छाँही  सफऱ में ...