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Thursday, 23 June 2011

एक गीत-सन्दर्भ बेटियाँ

मेरी बेटी  -सौम्या राय 
यह गीत मेरी बेटी सौम्या सहित देश की सभी बेटियों को समर्पित हैं 

बेटियाँ तो भोर की 
पहली किरन सी हैं |
ये कभी थकती नहीं 
नन्हें हिरन सी हैं |

जिन्दगी में पर्व ये 
त्यौहार लाती  हैं ,
सुर्ख रँगोली बनाकर 
गीत गाती हैं ,
यज्ञ की वेदी यही 
पूजा- हवन सी हैं |

हँस पड़ें तो फूल 
रो दें झील होती हैं ,
ये अँधेरी रात में 
कंदील होती हैं ,
ये जमीनों ,आसमानों 
के मिलन सी हैं |

जब तलक होतीं 
पिता का घर सजातीं हैं ,
ये समय पे धूप 
घर में छाँव लती हैं ,
ये तपन में ग्रीष्म की 
शीतल पवन सी हैं |

एक गीत -मोगरे का फूल जूड़े में

  चित्र साभार गूगल  एक गीत -मोगरे का फूल जूड़े में  मोगरे का फूल  जूड़े में  सजाती है.  नदी हँसकर  ज़िन्दगी का   गाती  है. धूप -छाँही  सफऱ में ...