Friday, 19 April 2019

एक गीत-अनवरत जल की लहर सी

चित्र-गूगल से साभार

एक गीत-अनवरत जल की लहर सी


समय का
उपहास कैसे
सह रही हो तुम ।
अनवरत
जल की
लहर सी बह रही हो तुम ।

भागवत
की कथा हो
या गीत मौसम के,
किसी
भी दीवार पर
जाले नहीं ग़म के,
किस
तरह की
साधना में रह रही हो तुम।

खिल रहे
मन फूल जैसे
रातरानी गंध वाले,
बिना
कांजीवरम के
भी रंग हैं तेरे निराले,
बिना
शब्दों के बहुत
कुछ कह रही हो तुम ।

गाल पर
जूड़े बिखर कर
सो रहे होंगे,
बीज
सपनों के नयन
फिर बो रहे होंगे,
छाँह
आँगन में
सजाकर दह रही हो तुम।

Monday, 15 April 2019

एक गीत -जागो मतदाता भारत के



चित्र -साभार गूगल 


एक विक्षोभ से उपजा गीत-जागो मतदाता भारत के 
फिर एक
महाभारत होगा
दुर्योधन खुलकर बोल रहा ।
द्रौपदी हो
गयी अपमानित
कौरव सिंहासन डोल रहा ।


संसद में
कचरा मत फेंको
इतिहास तुम्हें गाली देगा,
अच्छे फूलों की
खुशबू तो
अच्छा उपवन, माली देगा,
जागो मतदाता
भारत के
यह वक्त तुम्हें ही तोल रहा ।

भाषा-बोली
आचरण हीन,
प्रतिनिधि कैसे बन जाते हैं,
मत राष्ट्रगीत
की बात करो
ये राष्ट्रगान कब गाते हैं ?
इस राजनीति
के गिरने में
बस वोट बैंक का रोल रहा ।

तमगे
लौटाने वाले चुप
नारीवादी ख़ामोश रहे ,
कुछ अमृत पी
कुछ मदिरा पी
दरबारों में मदहोश रहे ,
हंसो के
मानसरोवर में
कोई तो है विष घोल रहा |

यह मौन
तुम्हारा सुनो भीष्म
सर शैय्या पर लज्जित होगा,
हे द्रोण ! कृपा !
अश्वस्थामा !
तू भी कल अभिशापित होगा,
गांधारी
पट्टी बांधे है
धृतराष्ट्र मुखौटा खोल रहा ।

Sunday, 14 April 2019

एक प्रेम गीत -हरी घास मेड़ों की



चित्र -साभार गूगल 

एक प्रेमगीत -हरी घास मेड़ों की 

जूड़े में 
बेला फिर 
गूँथ रही शाम |
मौसम 
ने आज लिखा 
चिट्ठियाँ अनाम |

टहनी की 
कलियों ने 
पाँव छुए फूल के ,
हँसकर के  
गोड़ रंगे 
नाउन फिर धूल के ,
पिंजरे में 
एक सुआ 
कहे राम -राम |

महुआ के 
फूल चुए 
बीन रहा कोई ,
चुपके से 
अलबम को 
छीन रहा कोई ,
खिड़की से 
झाँक कोई 
कर गया प्रणाम |

आम के 
टिकोरे हैं 
कहीं छाँह पेड़ों की ,
पायल से
 बात करे 
हरी घास मेड़ों की ,
सोया है 
चाँद कोई  
लगा रहा बाम |
चित्र -साभार गूगल 

एक गीत -आकाशी गुब्बारों को

चित्र -गूगल से साभार 


एक गीत -
आकाशी गुब्बारों को 

किसको चुनें
जातियों को या 
रंग -बिरंगे नारों को |
आज़ादी 
थक गयी उड़ाकर 
आकाशी गुब्बारों को  |

राजनीति में 
जुमलेबाजी- 
भाषण कुछ अय्यारी है ,
लोकतंत्र में 
कुछ परिवारों 
की ही ठेकेदारी है ,
गंगाजल से 
धोना होगा 
संसद के गलियारों को |

केवल  -अपनी 
भरे तिजोरी 
जो भी आते -जाते है ,
अपने -अपने 
धर्मग्रन्थ की 
झूठी कसमें खाते हैं |
अंधी न्याय 
व्यवस्था देती 
न्याय कहाँ लाचारों को |

नक्सलवादी-
भ्रष्टाचारी 
कुछ नेता अभिमानी हैं ,
कुछ भारत में 
रहकर के भी 
दिल से पाकिस्तानी हैं ,
गले लगाते 
कलमकार ,
कुछ अभिनेता, गद्दारों को |

राष्ट्रधर्म -
ईमान हमारा 
सदियों से ही खोया है ,
चीरा -टाँके 
लगे हमेशा 
संविधान भी रोया है ,
सब अपना 
दायित्व भूलकर 
याद रखे अधिकारों को |

आँख -कान 
कुछ बन्द न रखना 
इनकी -उनकी सुनियेगा ,
जिसका 
अच्छा काम रहा हो 
उसको प्रतिनिधि चुनियेगा ,
कद -काठी 
सब नाप-जोख के 
रखना चौकीदारों  को |

चित्र -साभार गूगल 

चित्र -साभार गूगल 


Saturday, 13 April 2019

आस्था का गीत -पालने में आज प्रभु श्रीराम सोयेंगे

चित्र -साभार गूगल 

आस्था का गीत-रामनवमी पर विशेष 
मर्यादा पुरुषोत्तम राम का आज जन्मदिवस है जन्मदिन की बधाई कैसे दूँ ,राम आज भी बेघर हैं,वही राम जो सृष्टि के पालनहार है ।राम का वनवास तो कभी खत्म ही नहीं हुआ ।अपनी व्याकुलता को गीत का रूप देना ही उचित लगा ।आप सभी को रामनवमी की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं ।
दोहा -
स्वनिर्मित इस सृष्टि में बेघर हैं श्रीराम ।
अब भी रावण,मंथरा बदल गए बस नाम ।

गीत-पालने में आज प्रभु श्रीराम सोयेंगे 

पालने में
आज प्रभु
श्रीराम सोयेंगे ।
खिलखिलाकर
हँसेंगे, फिर
चिहुँक रोयेंगे ।


खत्म होता
क्यों नहीं
वनवास तेरा राम ,
अब
अयोध्या में
नहीं दीपावली की शाम,
मलिन
सरयू जल
कहाँ तक पाप धोयेंगे |

मंथराओं के
सुदिन हैं
तुम्हे निष्कासन,
हो गया
अभिशप्त
कौशल राज सिंहासन,
हारना
मत समर
तुलसीदास रोयेंगे ।

महासागर
पार तुम
डूबे नदी में,
हैं कई
रावण,विधर्मी
इस सदी में,
पंचवटियों
में सुनहरे
हिरण खोयेंगे ।

Wednesday, 10 April 2019

एक गीत -फिर सोने की चिड़िया होगी माटी हिंदुस्तान की

चित्र-साभार गूगल

एक गीत-मतदाता जागरूकता के लिए
फिर सोने की माटी  होगी अपने हिंदुस्तान की


फिर सोने की
चिड़िया होगी
माटी हिन्दुस्तान की ।
अबकी है
उम्मीद आपसे
सौ प्रतिशत मतदान की।

जाति-धरम
विद्वेष भूलकर
मतपेटी को भरियेगा,
अब चुनाव
आयोग कड़क है
गुंडों से मत डरियेगा ,
मतपेटी ही
रक्षा करती
वोटर के सम्मान की।

दुनिया भर में
लोकतंत्र की
भारत एक मिसाल है,
घर से हँसकर
चलें बूथ तक
सबका यही ख़याल है।
हर चुनाव है
कठिन परीक्षा
वोटर के ईमान की ।

(08-04-2019 को उत्तर प्रदेश चुनाव आयोग द्वारा मतदाता जागरूकता के लिए हिंदी संस्थान के यशपाल सभागार में एक कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया।इस अवसर पर अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री ब्रह्मदेव राम तिवारी,श्री जितेंद्र कुमार प्रमुख सचिव भाषा,श्री अवनीश अवस्थी डिप्टी चीफ सेक्रेटरी उत्तर प्रदेश मौजूद रहे।

Thursday, 4 April 2019

एक गीत -मोक्ष लिखता है रसूलाबाद

संगम प्रयागराज 


प्रयागराज में रसूलाबाद जहाँ श्मशान के लिए जाना जाता है, वहीं साहित्यकार संसद भी महादेवी वर्मा जी ने स्थापित किया था, जिसकी वह ट्रस्टी भी रहीं |निराला की कविता बाधों न नाव इस ठाँव बन्धु यहीं रची गयी |उमाकान्त मालवीय, इलाचंद जोशी,मैथिलीशरण गुप्त ,सियारामशरण गुप्त ,डॉ धर्मवीर भारती ,कमलेश्वर ,रवीन्द्र कालिया ,सतीश जमाली ,अमरनाथ श्रीवास्तव का यहाँ से नाता या जुड़ाव रहा है |आज भी भाई यश मालवीय आत्मीयता से यहाँ मिलते हैं और पिता की शानदार विरासत सम्हाले हुए हैं | एक स्त्री होते हुए महराजिन बुआ दाह संस्कार कराकर विश्व प्रसिद्द हो गयीं | महान आज़ादी के नायक चंद्रशेखर आज़ाद का नश्वर शरीर भी यहीं गंगा की लहरों में समा गया था | लोकप्रिय कवि एवं समीक्षक आदरणीय भाई ओम निश्चल जी से मेरी प्रथम मुलाकात इसी रसूलाबाद में यश मालवीय जी के यहाँ हुई थी |

एक गीत -हर लहर पर मोक्ष लिखता है रसूलाबाद 

हर लहर पर 
मोक्ष 
लिखता है रसूलाबाद |
मौन से 
बस मौन का 
होता यहाँ संवाद |

कुछ कथाएं ,
गीत के स्वर ,
धार में बहते ,
राख ओढ़े 
जिल्द में 
कुछ संस्मरण रहते ,

सभी मौसम
बाँटते 
हर दिन यहाँ अवसाद |

सुबह पुल भी 
देखता है 
नाव पर सूरज ,
कभी 
महराजिन बुआ 
थी यहाँ का अचरज ,

अदब के 
सिर पर 
मुकुट सा है इलाहाबाद |

यहीं से 
कुछ दूर नदियों 
 के मिलन के गीत ,
समय 
साधो सुने पल -
पल भक्ति के संगीत ,

कुम्भ है 
इस नगर का 
प्राचीनतम आह्लाद |

चित्र -साभार गूगल 

विश्व राजनेता मोदी जी

माननीय प्रधानमंत्री भारत सरकार  श्री नरेंद्र मोदी जी  मोदी जी अब विश्व नेता बन चुके हैं-भारत की अलग पहचान बनाने वाले प्रधानमंत्री फिर विकास ...