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Monday, 12 September 2016

एक गीत- माहेश्वर तिवारी जी के लिए -उसका होना उज्जयिनी में कालिदास के होने जैसा


वरिष्ठ हिंदी गीत कवि -श्री माहेश्वर तिवारी 



वरिष्ठ गीत कवि  आदरणीय  माहेश्वर तिवारी जी के लिए जिन्हें बीमारी के बाद नया जीवन मिला है अब स्वस्थ होकर घर पर आ गये हैं -शतायु होने की शुभकामनाओं के साथ 

माहेश्वर तिवारी जी के लिए एक गीत -
उसका होना उज्जयिनी में कालिदास के होने जैसा 

फूलों सा 
मुरझा करके भी 
लौटा जो वह गीतकार है |
उसका हँसना 
छन्द सरीखा 
उसका लिखना चमत्कार है |

पीतल की 
नगरी में रहकर 
जिसका दिल है सोने जैसा ,
उसका होना 
उज्जयिनी में 
कालिदास के होने जैसा ,
सब ऋतुओं का 
रंग समेटे 
मेघदूत की वह पुकार है |

उसकी कलम 
कनेरों वाली 
शब्दों में जादुई छुवन है ,
कविता के 
निःस्सीम क्षितिज पर 
इन्द्रधनुष सा उसका मन है |
गीतों को भी 
वह प्यारा है 
उसे गीत से बहुत प्यार है |

सोंधी मिटटी का 
माहेश्वर 
हिम शिखरों का नहीं पुजारी ,
वह बसंत के 
फूलों जैसा 
उसका घर फूलों की क्यारी ,
कवि शतायु 
तक लिखते जाना 
जीवन गीतों का उधार है |
कनेर के फूल 

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