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Thursday, 4 April 2019

एक गीत -मोक्ष लिखता है रसूलाबाद

संगम प्रयागराज 


प्रयागराज में रसूलाबाद जहाँ श्मशान के लिए जाना जाता है, वहीं साहित्यकार संसद भी महादेवी वर्मा जी ने स्थापित किया था, जिसकी वह ट्रस्टी भी रहीं |निराला की कविता बाधों न नाव इस ठाँव बन्धु यहीं रची गयी |उमाकान्त मालवीय, इलाचंद जोशी,मैथिलीशरण गुप्त ,सियारामशरण गुप्त ,डॉ धर्मवीर भारती ,कमलेश्वर ,रवीन्द्र कालिया, ममता कालिया जी,सतीश जमाली ,अमरनाथ श्रीवास्तव का यहाँ से नाता या जुड़ाव रहा है | | एक स्त्री होते हुए महराजिन बुआ दाह संस्कार कराकर विश्व प्रसिद्द हो गयीं | महान आज़ादी के नायक चंद्रशेखर आज़ाद का नश्वर शरीर भी यहीं गंगा की लहरों में समा गया था |

एक गीत -हर लहर पर मोक्ष लिखता है रसूलाबाद 

हर लहर पर 
मोक्ष 
लिखता है रसूलाबाद |
मौन से 
बस मौन का 
होता यहाँ संवाद |

कुछ कथाएं ,
गीत के स्वर ,
धार में बहते ,
राख ओढ़े 
जिल्द में 
कुछ संस्मरण रहते ,

सभी मौसम
बाँटते 
हर दिन यहाँ अवसाद |

सुबह पुल भी 
देखता है 
नाव पर सूरज ,
कभी 
महराजिन बुआ 
थी यहाँ का अचरज ,

अदब के 
सिर पर 
मुकुट सा है इलाहाबाद |

यहीं से 
कुछ दूर नदियों 
के मिलन के गीत ,
समय 
साधो सुने पल -
पल भक्ति के संगीत ,

कुम्भ है 
इस नगर का 
प्राचीनतम आह्लाद |

चित्र -साभार गूगल 

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