Showing posts with label एक गीत-पियराये पत्तों से. Show all posts
Showing posts with label एक गीत-पियराये पत्तों से. Show all posts

Saturday, 11 May 2019

एक गीत-पियराये पत्तों से





चित्र-साभार गूगल

एक गीत-पियराये पत्तों से

पियराये
पत्तों से
हाँफती जमीन ।
उड़ा रहीं
राख-धूल
वादियाँ हसीन ।

दूर कहीं
मद्धम सा
वंशी का स्वर,
पसरा है
जंगल में
सन्नाटा-डर,
चीख रहे
पेड़ों को
चीरती मशीन ।

सूख रहीं
हैं नदियाँ
सौ दर्रे ताल में,
अधमरी
मछलियाँ
हैं मौसम के जाल में,
फूलों में
गन्ध नहीं
भ्रमर दीन-हीन ।
चित्र-साभार गूगल

एक गीत -मोगरे का फूल जूड़े में

  चित्र साभार गूगल  एक गीत -मोगरे का फूल जूड़े में  मोगरे का फूल  जूड़े में  सजाती है.  नदी हँसकर  ज़िन्दगी का   गाती  है. धूप -छाँही  सफऱ में ...