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Sunday, 31 July 2022

एक ग़ज़ल -राम को जब कोई हैवान भुला देता है


प्रभु श्रीराम 


एक ग़ज़ल --
कोई मौसम कहाँ सूरज को बुझा देता  है

शांत मौसम में हरा पेड़ गिरा देता है
ये वही जाने किसे, कौन सज़ा देता है

सब उजाले में शहँशाह समझते खुद को
रात में नींद में इक ख़्वाब डरा देता है

उसका घर वैसा ही है जैसा बना है मेरा
आदतन फिर भी वो शोलों को हवा देता है

बुझ गए जब भी दिए दोष हवाओं का रहा
कोई मौसम कहाँ सूरज को बुझा देता है

स्वर्ण की जलती हुई लंका ही मिलती है उसे
राम को जब कोई हैवान भुला देता है 

कवि -शायर जयकृष्ण राय तुषार 


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  चित्र साभार गूगल  एक गीत -मोगरे का फूल जूड़े में  मोगरे का फूल  जूड़े में  सजाती है.  नदी हँसकर  ज़िन्दगी का   गाती  है. धूप -छाँही  सफऱ में ...