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| चित्र साभार गूगल |
एक गीत -भींगा मौसम
एक गीत -भींगा मौसम
भींगा मौसम
छत पर कोई
और चाँदनी रात.
बेला, गुड़हल
चम्पा, जूही
सबसे होगी बात.
तेज हवा के
झोंके मन की
खिड़की खोल रहे,
इंद्रधनुष के
आँगन में
खुश बादल डोल रहे,
घाटी -घाटी
बनजारों के
संग हैं कोल -किरात.
नदी ढूँढते
पंछी सारे
जून -जुलाई के,
नई -नई
आँखों में सपने
गोद भराई के,
मंडप -मंडप
कलश सजे हैं
हल्दी, दही, परात.
नज़र झुकाये राही
कच्चे रस्ते
फिसलन के,
रह रह किस्से
याद आ रहे
भूले बचपन के,
हरे हरे
पत्तों पर गिरती
बूंदों का आघात.
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| चित्र साभार गूगल |
कवि /गीतकार
जयकृष्ण राय तुषार

