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| चित्र -गूगल से साभार माँ की स्मृतियों को प्रणाम करते हुए |
एक गीत -माँ ! नहीं हो तुम
माँ !नहीं हो
तुम कठिन है
मुश्किलों का हल |
अब बताओ
किसे लाऊँ
फूल ,गंगाजल |
सफ़र से
पहले दही -गुड़
होंठ पर रखती ,
किन्तु घर के
स्वाद कड़वे
सिर्फ़ तुम चखती ,
राह में
रखती
हमारे एक लोटा जल |
सांझ को
किस्से सुनाती
सुबह उठ कर गीत गाती ,
सगुन -असगुन
पर्व -उत्सव
बिना पोथी के बताती ,
रोज
पूजा में
चढ़ाती देवता को फल |
तुम दरकते
हुए रिश्तों की
नदी पर पुल बनाती |
मौसमों का
रुख समय से
पूर्व माँ तुम भाँप जाती ,
तुम्हीं से
था माँ !
पिता के बाजुओं में बल |
मौन में तुम
गीत चिड़ियों का
अंधेरे में दिया हो ,
माँ हमारे
गीत का स्वर
और गज़ल का काफ़िया हो ,
आज भी
यादें तुम्हारी
हैं मेरा संबल |
