![]() |
| चित्र -गूगल से साभार |
फूल देकर गया कोई चाय देने के बहाने
आम के
नन्हें टिकोरे
हो गए कितने सयाने |
झील ,पर्वत ,
घाटियाँ सब
हो गए इनके ठिकाने |
कसमसाकर
खुले जूड़े ,हरे -
वन ,सिवान महके ,
गांछ पर
सोये पलाशों के
हृदय प्रेमाग्नि दहके ,
फूल देकर
गया कोई
चाय देने के बहाने |
एक चिड़िया
सुबह दरपन को
निहारे ,चोंच मारे ,
मौसमों के
रंग बदले
और चढ़ने लगे पारे ,
पेड़ के
कोटर बहेलिए
आ गए तोते चुराने |
अजनबी ने
पता पूछा
हम उसी के हो गए ,
गाँव की
जानी हुई
पगडंडियों में खो गए ,
दिन अबोले
कनखियों से

