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Sunday, 26 February 2012

एक गीत -फूल देकर गया कोई

चित्र -गूगल से साभार 
फूल देकर गया कोई चाय देने के बहाने 
आम के 
नन्हें टिकोरे 
हो गए कितने सयाने |
झील ,पर्वत ,
घाटियाँ सब 
हो गए इनके ठिकाने |

कसमसाकर 
खुले जूड़े ,हरे -
वन ,सिवान महके ,
गांछ पर 
सोये पलाशों के 
हृदय प्रेमाग्नि दहके ,
फूल देकर 
गया कोई 
चाय देने के बहाने |

एक चिड़िया 
सुबह दरपन को 
निहारे ,चोंच मारे ,
मौसमों के 
रंग बदले 
और चढ़ने लगे पारे ,
पेड़ के 
कोटर बहेलिए 
आ गए तोते चुराने |

अजनबी ने 
पता पूछा 
हम उसी के हो गए ,
गाँव की 
जानी हुई 
पगडंडियों में खो गए ,
दिन अबोले 
कनखियों से 
लगे  फिर हमको बुलाने |
चित्र -गूगल से साभार 

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