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| चित्र साभार गूगल |
एक ग़ज़ल-
स्वर्ग सा इस देश का वातावरण हो जाएगा
छल, कपट,और लोभ का यदि संवरण हो जाएगा
स्वर्ग सा इस देश का वातावरण हो जाएगा
प्रकृति का सौंदर्य कम कर आपने सोचा कभी
बाँध से नदियों के जल का अपहरण हो जाएगा
पंचवटियों में नया सोने का मृग फिर भेजकर
वह बहुत खुश था कि फिर सीताहरण हो जाएगा
तोतली भाषा है बच्चे की अभी मत टोकिए
कल यही पाणिनि का सुन्दर व्याकरण हो जाएगा
आप अब तक पढ़ रहे दुष्यन्त का "साये में धूप"
कल हमारा शेर सबका उद्धरण हो जाएगा
झील,पर्वत,वन,नदी,बादल की पूजा कीजिए
फिर से धरती का सुखद वातावरण हो जाएगा
अब न राजा,ऋषि, न अँगूठी न शाकुन्तल वही
आज के दुष्यन्त को सब स्मरण हो जाएगा
जब कभी आतंक असुरों का बढ़ेगा देखना
राम या तो कृष्ण का फिर अवतरण हो जाएगा
आप पश्चिम के ही दर्शन में अगर डूबे रहे
वेद,गीता,उपनिषद का विस्मरण हो जाएगा
आप मानेंगे अगर अपने बुजुर्गों की सलाह
आपकी भी बात का कल अनुसरण हो जाएगा
कवि/शायर जयकृष्ण राय तुषार
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| चित्र -साभार गूगल |

