Monday, 13 December 2021

एक गीत लोकभाषा-काशी

 

 हर हर महादेव 

हर हर महादेव ।काशी के प्राचीन और वर्तमान वैभव अध्यात्म के नमन

काशी पर कुछ लिखना मुझ जैसे अदना कवि के लिए संभव नहीं फिर भी एक कोशिश-


काशी अनादि,सत्य,सनातन महान हौ

काशी सजल हौ आज अनोखा विहान हौ


घर-घर सजल हौ फूल की

खुशबू से इत्र से

गलियारा भरि गइल हौ

अतिथि,इष्ट-मित्र से

डमरू बजत हौ

घाट-घाट शंखनाद हौ

गंगा के घाट-धार में

कलकल निनाद हौ


रुद्राक्ष हौ गले में भरल मुँह में पान हौ

काशी सजल हौ आज अनोखा विहान हौ


चौरासी घाट से सजल ई

शिव क धाम हौ

बस हर हर महादेव इहाँ

सुबह शाम हौ

अवधूत,संत शिव की

शरण मे गृहस्थ हौ

गाँजा चिलम औ

भाँग के संग काशी मस्त हौ


कबीरा, रैदास औ इहाँ तुलसी क मान हौ

काशी सजल हौ आज अनोखा विहान हौ


मोदी में आस्था भी हौ

श्रद्धा अपार हौ

ई काशी विश्वनाथ कै

अद्भुत श्रृंगार हौ

पंचकोशी मार्ग हौ इहाँ

भैरव क मान हौ

अध्यात्म तंत्र-मंत्र

इहाँ मोक्ष ज्ञान हौ


संगीत औ शास्त्रार्थ में एकर बखान हौ

काशी सजल हौ आज अनोखा विहान हौ

काशी नहीं भागै न

परालै तूफ़ान से

शिव के त्रिशूल पर

हौ टिकल आन-बान से

काशी नहीं अनाथ

इहाँ सारनाथ हौ

भक्तन के शीश पर

इहाँ गंगा कै हाथ हौ


घर-घर में इहाँ वेद-पुरानन क ज्ञान हौ

काशी सजल हौ आज अनोखा विहान हौ


कवि -जयकृष्ण राय तुषार



Sunday, 12 December 2021

एक ग़ज़ल-अच्छी चीजें सबको अच्छी लगती हैं

चित्र साभार गूगल


एक ताज़ा ग़ज़ल-

अच्छी चीजें सबको अच्छी लगती हैं


राग ,रंग,सुर,ताल बदलकर गाता है

खुशबू,बारिश,धूप का मौसम आता है


कोई दरिया खारा कोई मीठा है

प्यास बुझाता कोई प्यास बढ़ाता है


अच्छी चीजें सबको अच्छी लगती हैं

बच्चा भी खिड़की से चाँद दिखाता है


सबको शक था कौन है उसके कमरे में

अक्सर वह आईने से बतियाता है


तुलसी,ग़ालिब,मीर पढ़ो या खुसरो को

बाल्मीकि ही छन्दों का उद्गाता है


जब भी तन्हा दिल में ज्वार उमड़ता है

सागर भी साहिल से मिलने आता है


कवि -जयकृष्ण राय तुषार 

चित्र साभार गूगल


चित्र साभार गूगल

Sunday, 5 December 2021

एक ग़ज़ल-कितना अच्छा मौसम यार पुराना था

 

चित्र साभार गूगल

एक ग़ज़ल-

कितना अच्छा मौसम यार पुराना था


कितना अच्छा मौसम यार पुराना था

घर- घर में सिलोन रेडियो गाना था


खुशबू के ख़त होठों के हस्ताक्षर थे

प्रेम की आँखों में गोकुल,बरसाना था


कौन अकेला घर में बैठा रोता था

सुख-दुःख में हर घर में आना-जाना था


रिश्तों में खटपट थी तू-तू ,मैं मैं भी

फिर भी मरते दम तक साथ निभाना था


महबूबा की झलक भी उसने देखी कब

बस्ती की नज़रों में वह दीवाना था


कहाँ रेस्तरां होटल फिर भी मिलना था

गाँव के बाहर पीपल एक पुराना था


गाय, बैल,चिड़ियों से बातें होती थी

बेज़ुबान पशुओं से भी याराना था


घर भर उससे लिपट के कितना रोये थे

बेटे को परदेस कमाने जाना था


बरसों पहले गाँव का ऐसा मंज़र था

नदियाँ टीले जंगल ताल मखाना था

कवि-जयकृष्ण राय तुषार


चित्र साभार गूगल

Wednesday, 1 December 2021

एक ग़ज़ल-कोई गा दे मुझे पीनाज़ मसानी की तरह

 

सुप्रसिद्ध ग़ज़ल गायिका 
पीनाज़ मसानी

एक ग़ज़ल-

कोई गा दे मुझे पीनाज मसानी की तरह 


धूप के साथ में बारिश की कहानी की तरह

तुम हो सहरा में किसी झील के पानी की तरह


कोई पानी नहीं देता उसे मौसम के सिवा

फिर भी जंगल है हरा रात की रानी की तरह


वक्त ने छीन लिया वेश बदलकर सब कुछ

ज़िन्दगी हो गयी है कर्ण से दानी की तरह


मैं भी कहता हूँ ग़ज़ल डूब के तन्हाई में

कोई गा दे मुझे पीनाज़ मसानी की तरह


कब ठहरता यहाँ यादों का सुहाना मौसम

सिर्फ़ कुछ देर रहा आँख के पानी की तरह

कवि /शायर जयकृष्ण राय तुषार

चित्र साभार गूगल


Tuesday, 30 November 2021

एक ग़ज़ल-हमारे दौर में भी फिर कोई आज़ाद बिस्मिल हो

 

आज़ाद

आज़ादी के अमृत महोत्सव पर

एक ग़ज़ल-हमारे दौर में भी


ये आज़ादी का उत्सव है खुशी के साथ हर दिल हो

हमें सोने की चिड़िया का वही सम्मान हासिल हो


किताबों में चचा नेहरू के ही सारे क़सीदे हैं

आज़ादी के सिलेबस में कहानी और शामिल हो


कोई भी मुल्क बस इतिहास से जिन्दा नहीं रहता

हमारे दौर में भी फिर कोई आज़ाद बिस्मिल हो


जवानों सरहदों पर फिर से दिवाली मना लेना

पीओके ,अक्साई चिन हमें इस बार हासिल हो


चुनावी पंचवटियों में कई मारीचि आएंगे

हिरन की चाल समझे इस तरह जनता ये क़ाबिल हो


तिरंगे,मुल्क का अपमान अब हरगिज़ नहीं सहना

समंदर से सितारों तक हमारी राह मंज़िल हो

जयकृष्ण राय तुषार

बिस्मिल


एक ग़ज़ल-हमारे दौर की दुनिया

 

 

चित्र साभार गूगल


एक ग़ज़ल-हमारे दौर की दुनिया है 

हमारे दौर की दुनिया है कारोबार में शामिल
प्रथाएँ, रीतियाँ,रस्में सभी बाज़ार में शामिल

कहाँ अब हीर,राँझा और कहाँ फ़रहाद, शीरीं हैं
लहू के खत कहाँ अब जिस्म केवल प्यार में शामिल

अँधेरों को उजाला  लिख रहा है फिर कोई शायर
सुना है इन दिनों वह हो गया सरकार में शामिल

न उसको ईद से मतलब न रोज़ेदार ही ठहरा
सियासत के लिए बस हो गया इफ़्तार में शामिल

ख़बर भी आजकल जैसे मदारी का तमाशा है
मिलावट का नशा भी हो गया अख़बार में शामिल

अगर तुम राम थे सीताहरण को रोक सकते थे
मगर क्यों हो गए इन्सान के क़िरदार में शामिल

यहाँ इंसाफ़ की देवी की भी आँखों पे पट्टी है
जिसे मुज़रिम पकड़ना है वो भ्रष्टाचार में शामिल

जिसे भगवान कहते थे वही यमराज बन बैठे
कमीशन,जाँच सब कुछ हो गया उपचार में शामिल

प्रदूषण मुक्ति के नारे सभी गंगा के घाटों पर
भगीरथ बन के अब कोई कहाँ उद्धार में शामिल

कवि -जयकृष्ण राय तुषार





Thursday, 18 November 2021

एक ग़ज़ल-वो मीर की ग़ज़ल है

 

चित्र साभार गूगल

एक ग़ज़ल-वो मीर की ग़ज़ल है


खुशबू किसी के रेशमी बालों से आ रही

वो मीर की ग़ज़ल है रिसालों से आ रही


सुनता कोई अकेले में खुलकर कोई इसे

कैसी सदा-ए-इश्क़ है सालों से आ रही


हम चाँदनी का ख़्वाब सजाते ही रह गए

चादर धुएँ की दिन के उजालों से आ रही


पत्ते-तने हरे थे मगर फल कहीं न थे

चिड़िया उदास आम की डालों से आ रही


जादूगरी,तिलस्म किसी काम का नहीं

मुश्किल तमाशा देखने वालों से आ रही

कवि -जयकृष्ण राय तुषार 

चित्र साभार गूगल 


Monday, 15 November 2021

एक ग़ज़ल-आखिरी फूल हैं मौसम के

 

चित्र साभार गूगल


एक ग़ज़ल-आख़िरी फूल हैं मौसम के


सिर्फ़ मधुमास के मौसम में ही ये खिलते हैं

आख़िरी फूल हैं मौसम के चलो मिलते हैं


जागकर देखिए जलते हैं ये औरों के लिए

ये दिए दिन के उजाले में कहाँ जलते हैं


आसमानों के कई रंग हैं सूरज हम तो

एक ही रंग में पश्चिम की दिशा ढ़लते हैं


सिद्ध जो असली  ज़माने को दुआ देते हैं

कुछ तमाशाई हैं जो पानियों पे चलते हैं

जयकृष्ण राय तुषार

चित्र साभार गूगल


एक ग़ज़ल-जो कभी आँखों में बनकर ख़्वाब सा रहता रहा

 

चित्र साभार गूगल

एक ग़ज़ल-दास्ताँ कहता रहा


रेत,जंगल,रास्तों के दरमियाँ बहता रहा

मैं था दरिया हर सदी की दास्ताँ कहता रहा


जब महल था तो चराग़ों से कभी खाली न था

खण्डहर बनकर हसीं मौसम में भी ढहता रहा


क़ाफ़िले जाते हैं बस केवल अमीरों की तरफ़

मैं तो बस आखेट के मौसम में एक रस्ता रहा


जिनमें फल थे वो परिंदो का ठिकाना बन गए

एक सूखा पेड़ तनहा ग़म सभी सहता रहा


अब वो सहारा फूल की खुशबू का दीवाना हुआ

जो कभी आँखों में बनकर ख़्वाब सा रहता रहा

कवि -जयकृष्ण राय तुषार 




सभी चित्र गूगल से साभार

एक गीत-मुझे अब गाँव की पगडंडियों की याद आती है

 

चित्र साभार गूगल

एक गीत -

सफ़र में

अब कोई चिड़िया

कहाँ गाना सुनाती है ।

मुझे अब

गाँव की

पगडंडियों की याद आती है।


सफ़र में

धूप हो तो

नीम की छाया में सो जाना,

बिना मौसम की

बारिश में

हरे पेड़ों को धो जाना ,

अभी भी

स्वप्न में आकर के

माँ लोरी सुनाती है ।


नदी,नाले

पहाड़ी और 

टीले याद आते हैं,

अभी भी

लौटकर बचपन में

हम कंचे सजाते हैं,

विरहिणी

गाँव में

परदेस की चिट्ठी सजाती है ।


हमारे रास्तों में

अब नहीं

कोयल न मादल है,

नहीं वो

प्यास,पनिहारिन

नहीं आँखों में काजल है,

कहाँ मोढ़े

पर भाभी

ननद के जूड़े सजाती है ।

कवि जयकृष्ण राय तुषार

चित्र साभार गूगल


Monday, 8 November 2021

एक ग़ज़ल-उसको तो बस वृन्दावन तक जाना है


चित्र साभार गूगल 

एक ग़ज़ल-सूरदास को वृन्दावन तक जाना है


फूल,तितलियाँ, खुशबू सिर्फ़ बहाना है

तुमसे ही हर मौसम का अफ़साना है


नींद टूटने पर चाहे जो मंज़र हो

आँखों को तो हर दिन ख्वाब सजाना है


भूख-प्यास सब भूले चिंता ईश्वर की 

सूरदास को वृन्दावन तक जाना है


जीवन का रंग बदले हर दिन मौसम सा

हर दिन इसमें रूठना और मनाना है


आसमान से सभी परिंदे लौट रहे

रहने को बस धरती एक ठिकाना है

कवि-जयकृष्ण राय तुषार



                             
चित्र साभार गूगल 



Wednesday, 3 November 2021

एक गीत-राम का जयगान करती दीपमाला है

 


गीत-राम का जयगान करती दीपमाला है


राम का

जयगान 

करती दीपमाला है ।

यह सनातन

धर्म का

अप्रतिम उजाला है ।


कर रही

श्रृंगार सरयू

चमक आँखों में,

फूल में

खुशबू,हरापन

दग्ध शाखों में,

एक अनहद

नाद के

स्वर में शिवाला है ।


हँस रही

सारी अयोध्या

रात चन्दन है,

सिया के

प्रिय राम जी का

आज वन्दन है,

विष्णु के

अवतार का

हर रंग निराला है ।


देव ऋषिआम

गन्धर्व

जिसकी वंदना करते,

वही केवट

से विनयवत 

याचना करते,

राम का

दो शब्द ही

अमृत का प्याला है।


जयकृष्ण राय तुषार



एक आस्था का गीत-ज्योति जो जलती रहे वो दिया श्रीराम का हो

 


सभी को दीपावली की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं


एक गीत-ज्योति जो जलती रहे वो दिया श्रीराम का हो


घर का 

दीपक हो या

सरयू के पुण्य धाम का हो ।

ज्योति जो

जलती रहे वो

दिया श्रीराम का हो ।


अब न वनवास हो

माँ सीता का

अपमान न हो,

आसुरी 

शक्तियों का

देश मे गुणगान न हो,

शंख ध्वनि

मंत्रों से स्वागत

अब सुबह-शाम का हो ।


राम तो सबके

हैं जन-जन के

हैं सुखदायी हैं,

पुत्र हैं राजा हैं

वनवासी

मित्र,भाई हैं,

भक्त हनुमान से

कीर्तन हो

तो प्रभु नाम का हो ।

जयकृष्ण राय तुषार



एक ग़ज़ल -चाँदनी रातों में परियों की कहानी है कहाँ

 

चित्र साभार गूगल 



एक ग़ज़ल -
चाँदनी रातों में परियों की कहानी है कहाँ
इन परिंदो के लिए अब दाना पानी है कहाँ
जाति-मज़हब के बबूलों से ये चन्दन वन भरा
ख्वाब में जो थी वो चम्पा-रातरानी है कहाँ
इस सियासत में युगों से राम को वनवास है
अब खड़ाऊँ पूजती वो राजधानी है कहाँ
बदहवासी में कोई जिन्ना की माला जप रहा
अब महल में एक भी बेगम सयानी है कहाँ
सिर्फ़ तलवारों के बलपर जिनके सिंहासन रहे
ढूँढिए इतिहास में वो राजा,रानी है कहाँ
अपनी ही आवाज़ सुनकर मुग्ध हैं सारे कुएँ
पर हक़ीक़त है कि दरिया सी रवानी है कहाँ
रहनुमा,वोटर,सियासत सब बिकाऊ है यहाँ
बस किताबों में लिखा,ईमान 'जानी' है कहाँ



Wednesday, 13 October 2021

विश्व राजनेता मोदी जी

माननीय प्रधानमंत्री भारत सरकार 
श्री नरेंद्र मोदी जी 



मोदी जी अब विश्व नेता बन चुके हैं-भारत की अलग पहचान बनाने वाले प्रधानमंत्री

फिर विकास का दिया जलेगा 
तुष्टिकरण अब नहीं चलेगा 
राष्ट्रवाद के प्रहरी जागो 
गाँव -गाँव फिर कमल खिलेगा 


जयकृष्ण राय तुषार 
भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। मोदी जी का मंत्र सबका साथ सबका विकास कामयाब होगा।एक नए भारत का उदय हो रहा है।  मोदी को विश्व मीडिया,भारतीय मीडिया और भारत के बुद्धिजीवी खलनायक बनाने की कोशिश करते रहे लेकिन मोदी जी के बिना भेदभाव के काम से प्रभावित हैं।अपने संकल्प के साथ अपने मार्ग में बढ़ते गए।आज महाशक्तियां भी उनका लोहा मानने को विवश हैं।

कश्मीर समस्या,राम मंदिर और तीन तलाक कानून मोदी जी का अतुलनीय कार्य है।हमारे प्रधानमंत्री जी के कार्यकाल में ही भारतीय योग विश्व मे प्रतिष्टित हुआ है। काशी विश्व नाथ मंदिर का सुंदरीकरण,परिसर का भव्य स्वरूप ,काशी का आधुनिकीकरण आदि।

भारतीय मुस्लिम-
कुछ प्रतिशत को छोड़ दिया जाय तो भारत के मुस्लिम समाज के लोग भी अब मोदी जी के बिना भेदभाव के कार्य और योजनाओं से प्रभावित हैं।मुस्लिम विपक्ष की राजनीति से भी सजग हो गए हैं।केंद्र सरकार की तमाम योजनाएं बिना किसी भेदभाव के चल रही हैं।दंगों पर नियंत्रण हुआ शांति अमन कायम है ।विकास के लिए अमन का कायम होना जरूरी है।मुस्लिम समाज को भी चाहिए अपनी शिक्षा,जनसंख्या नियंत्रण के साथ कानून और वक्त के बदलाव को समझें ।भारत के विकास में अपना सौ प्रतिशत दें राष्ट्रपति कलाम जी को अपना आदर्श मानें।भारत के मुसलमान विश्व में अपने अच्छे कार्यों से देश की छवि को बेहतरीन बनाये।अपने समाज को भी तरक्की की राह पर ले जाएं।भारत से बेहतरीन और सुंदर राष्ट्र विश्व मे गिने चुने हैं।

योजनाएं
केंद्र सरकार ने दलालों,,विचौलियों का खेल, डिजिटल लेन  देन से बंद कर दिया ।एन0जी0 ओ0का खेल बन्द किया।निरन्तर सड़कों को बेहतर बनाने का काम गडकरी जी ने किया। ग्रामीण संपर्क मार्ग अटल जी ने शुरू किया।
जन धन खाता,किसान क्रेडिट कार्ड योजना,आवास,उज्ज्वला योजना,वन नेशन वन राशन कार्ड,किसानों को खाते में सीधे पैसा दिया गया।उपग्रहों की मदद से किसानों,मछुआरों को समय पर अलर्ट जारी किया जाने लगा। किसानों के हित के लिए हमारी केंद्र सरकार ने शानदार कार्य किया है ।देश के किसान खुशहाल हैं कुछ आन्दोलनजीवियों को छोड़कर ।

भारतीय सेना भारतीय सेना को तेजी से आधुनिक बनाने के साथ उसका मनोबल बढ़ाने का काम किया गया।भारतीय रक्षा अनुसंधान संगठन,इसरो को खुली छूट मिली देश की रक्षा जरूरतों को पूर्ण करने के लिए।दुश्मन का मनोबल सर्जिकल स्ट्राइक से तोड़ा गया।चीन का भौकाल मोदी ने खत्म कर दिया।भारत आज दुश्मनों में भय पैदा करता है।घुटने नहीं टेकता।

मोदी की प्रशंसा भारत में भले न हो विदेशों में यहां तक शत्रु राष्ट्र भी करते हैं।निरन्तर कार्य करना नई सोच को विकसित करना मोदी जी की बेहतरीन आदत है।मोदी जी ने भारतीय योग को भी विश्व मे प्रतिष्टित किया है।

आतंक -मोदी जी के पहले आतंकियों को राष्ट्रभक्त बताने का चलन विपक्ष ने वोट के लिए शुरू किया था।मोदी जी ने आतंक का अंत करने की ठान लिया और सरहद पर ही आज हमारे सुरक्षा बल काम तमाम कर दे रहे हैं।परिवार वाद लूटतंत्र पर कड़ा प्रहार मोदी राज में हुआ।




कश्मीर समस्या का समाधान,राम मंदिर ,तीन तलाक यादगार काम है जिसे पीढ़ियाँ याद रखेंगी।

माननीय प्रधानमंत्री जी आप भारत को विश्व गुरु बनाने में कामयाब हों।वन्देमातरम।

जयकृष्ण राय तुषार
उर्फ़
जयकृष्ण नारायण शर्मा
अधिवक्ता केंद्र सरकार



Tuesday, 12 October 2021

एक ग़ज़ल -उसी के क़दमों की आहट

 

चित्र साभार गूगल 

मित्रों मेरी यह ग़ज़ल भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित 'हिंदी की बेहतरीन ग़ज़लें 'साझा संग्रह में प्रकाशित है |स्मृतिशेष रवीन्द्र कालिया जी और श्री ज्ञानप्रकाश विवेक जी के सम्पादन में |

एक ग़ज़ल -उसी के क़दमों की आहट 

उसी के क़दमों की आहट सुनाई देती है 
कभी -कभार वो छत पर दिखाई देती है 

वो एक ख़त है जिसे मैं छिपाए फिरता हूँ 
जहाँ खुलूस की स्याही दिखाई देती है 

मैं उससे बोलूँ तो वो चुप रहे ख़ुदा की तरह 
मैं चुप रहूँ तो ख़ुदा की दुहाई देती है 

तमाम उम्र उँगलियाँ मैं जिसकी छू न सका 
वो चूड़ी वाले को अपनी कलाई देती है 

वो एक बच्ची खिलौनों को तोड़कर सारे 
बड़े खुलूस से माँ को सफ़ाई देती है 
जयकृष्ण राय  तुषार 
एक पुरानी पोस्ट 

श्री रवीन्द्र कालिया
पूर्व निदेशक भारतीय ज्ञानपीठ 

अपने शानदार लेखन और बेजोड़ सम्पादकीय हुनर के लिए भारतीय ज्ञानपीठ के पूर्व निदेशक और नया ज्ञानोदय के पूर्व सम्पादक रवीन्द्र कालिया हमेशा याद किये जाते रहेंगे | डॉ धर्मवीर भारतीय के साथ धर्मयुग से लम्बे समय तक जुड़े रहने के बाद इलाहाबाद में कालिया जी ने गंगा -जमुना का सम्पादन कर पत्रकारों की एक पीठी तैयार किया | ज्ञानपीठ को सचल बनाया और इलाहाबाद आकर ज्ञानपीठ ने अमरकांत को ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया |नया ज्ञानोदय के कई लोकप्रिय विशेषांक कालिया जी के संपादन में प्रकाशित हुए जिसमें युवा विशेषांक ,प्रेम महाविशेषांक और ग़ज़ल महाविशेषांक विशेष रूप से चर्चित रहे | ग़ज़ल महाविशेषांक में उर्दू हिंदी गजलकारों को साथ -साथ प्रकाशित किया गया | बाद में उर्दू की बेहतरीन ग़ज़लें किताब के रूप में हमारे सामने आ गयी |अब हिंदी की बेहतरीन ग़ज़लें पुस्तक रूप में हमारे सामने है |इस किताब के प्रधान सम्पादक रवीन्द्र कालिया और सम्पादक ज्ञानप्रकाश विवेक हैं |इस संग्रह में कुल 64 गजलकारों को सम्मलित किया गया है |अमीर खुसरो ,कबीर ,भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ,बद्रीनारायण उपध्याय प्रेमघन ,प्रताप नारायण मिश्र ,स्वामी रामतीर्थ ,लाला भगवानदीन ,मैथलीशरण गुप्त ,जयशंकर प्रसाद ,निराला ,त्रिलोचन ,शमशेरबहादुर सिंह दुष्यंत कुमार ,बलवीर सिंह रंग ,शलभ श्रीराम सिंह ,रामावतार त्यागी ,हरजीत सिंह ,अदम गोंडवी सहित तमाम आधुनिक गजलकार [मैं भी ] इस संग्रह में शामिल हैं |हम भाई ज्ञानप्रकाश विवेक ,आदरनीय रवीन्द्र कालिया और भारतीय ज्ञानपीठ के आभारी हैं ग़ज़ल विधा पर इस सुन्दर संकलन के लिए |


पुस्तक का नाम -हिन्दी की बेहतरीन ग़ज़लें 
सम्पादक -रवीन्द्र कालिया 
प्रकाशक -भारतीय ज्ञानपीठ ,नई दिल्ली 
मूल्य -रु० -180 [सजिल्द ]

चित्र साभार गूगल 


Monday, 4 October 2021

एक प्रेमगीत-अच्छा सा मौसम हो

 

चित्र साभार गूगल

एक प्रेमगीत-अच्छा सा मौसम हो


शीशे की

खिड़की में

कोई तुमसा दिखता हो।

अच्छा सा

मौसम हो

कोई कविता लिखता हो।


नाव वहीं हो

गंगा-जमुना

मिली जहाँ हँसकर,

एक अजनबी

डरकर बाहों में

जकड़े कसकर,

नज़र झुकाए

कोई हँसकर

नीचे तकता हो ।


बेमौसम

बारिश हो

भींगे फूलों पर तितली,

आँखों में

काजल,सावन हो

होठों पर कजली,

झीलों में

डूबा-उतराता

सूरज दिखता हो ।


नुक्कड़-नुक्कड़

काशी 

मुँह में पान दबाए हो,

कोई जुड़े में

फूलों का

लॉन सजाए हो,

अपना ही

श्रृंगार देखकर

दरपन हँसता हो ।

कवि-जयकृष्ण राय तुषार


चित्र साभार गूगल


चित्र साभार गूगल

Wednesday, 29 September 2021

एक गीत-उत्तर प्रदेश

 

 

काशी



यह पुण्य देवभूमि है

यह पुण्य देवभूमि है
यहाँ न कोई क्लेश है ।
ध्वज लिए विकास का
यह अग्रणी प्रदेश है
यह उत्तर प्रदेश है, यह उत्तर प्रदेश है ।

सुबहे काशी है यहीं
यहीं अवध की शाम है,
यह संत,ऋषि,विचारकों
औ ज्ञानियों का धाम है,
कला,कौशल विकास
हेतु पूँजी का निवेश है।
यह उत्तर प्रदेश है ,यह उत्तर प्रदेश है।

गंगा,जमुना,सरयू
पुण्य नदियों का प्रवाह है,
अनेकता में एकता का
प्रेम से निबाह है,
सारनाथ,कुशीनगर
बुद्ध का उपदेश है,
यह उत्तर प्रदेश है,यह उत्तर प्रदेश है।

काशी ,मथुरा,वृंदावन
गुरु गोरख यहीं मिले,
राम की अयोध्या में
अखण्ड दीप लौ जले,
परम्परा, नवीनता का
इसमें समावेश है ।
यह उत्तर प्रदेश है,यह उत्तर प्रदेश है।

चौरी-चौरा,झाँसी, मेरठ की
जमीन लाल है,
तीर्थ ये शहीदों का
ये क्रांति की मशाल है,
गौ माता का रक्षक है
ये किसानों का सुदेस है।
यह उत्तर प्रदेश है,यह उत्तर प्रदेश है।

चित्रकूट,श्रृंगवेरपुर
यहीं प्रयाग है,
विश्व पर्व कुम्भ 
इसमें धूनियों की आग है,
शिक्षा,ज्ञान,योग औ
अध्यात्म में विशेष है।
यह उत्तर प्रदेश है,यह उत्तर प्रदेश है।

रक्षक है सर्वधर्म की
माँ भारती महान है,
तुलसी के संग कबीर
औ रविदास जी का मान है,
माँ विन्ध्वासिनी की
दिव्य शक्ति भी अशेष है।
यह उत्तर प्रदेश है,यह उत्तर प्रदेश है।

स्वदेश के लिए यहाँ
बलिदान एक पर्व है,
झलकारी बाई,झाँसी
की रानी पर इसको गर्व है,
यह मंगल पांडे,बिस्मिल
और आज़ाद का प्रदेश है।
यह उत्तर प्रदेश है,यह उत्तर प्रदेश है।

यह विश्व राजनीति का
महान एक केंद्र है,
यहाँ का वीर सरहदों पे
बज्र ले महेंद्र है,
विभिन्न भाषा,बोलियाँ
विभिन्न भूषा-वेश है।
यह उत्तर प्रदेश है,यह उत्तर प्रदेश है।

बिरहा, कजरी ,आल्हा
इसके मौसमों का गीत है,
धान-पान धानी-हरे
गेहूँ स्वर्ण-पीत है,
झील-ताल खिलते कमल
खुशबुओं का देश है।
यह उत्तर प्रदेश है,यह उत्तर प्रदेश है।

राज्य का प्रतीक चिन्ह
मत्स्य और तीर है,
वृक्ष है अशोक, पुष्प
टेसू ज्यों अबीर है,
स्त्रियों के मान और
सम्मान का आदेश है।
यह उत्तर प्रदेश है,यह उत्तर प्रदेश है।

कवि जयकृष्ण राय तुषार




कवि-जयकृष्ण राय तुषार


Tuesday, 21 September 2021

एक गीत-चाँदनी निहारेंगे

 

चित्र साभार गूगल

एक गीत-चाँदनी निहारेंगे


रंग चढ़े

मेहँदी के

मोम सी उँगलियाँ ।

धानों की

मेड़ों पर

मेघ औ बिजलियाँ ।


खुले हुए

जूड़े और

बच्चों के बस्ते,

हँसकर के

खिड़की से

सूर्य को नमस्ते,

फूलों का

माथ चूम

उड़ रहीं तितलियाँ ।


 ढूँढ रहे

अर्थ सुबह

रातों के सपने,

रखकर

ताज़ा गुलाब

पत्र लिखा किसने,

आटे की

गोली सब

खा गयीं मछलियाँ ।


आहट

दीवाली की

किस्से रंगोली के,

दिन लौटे

दिए और

पान-फूल रोली के

चाँदनी

निहारेंगे छत

आँगन-गलियाँ ।



Thursday, 16 September 2021

एक गीत-हिंदी रानी माँ सी

 


एक गीत-हिंदी रानी माँ सी


पखवाड़ा भर

पूजनीय है

बाकी दिन है दासी ।

सिंहासन अब

उसे सौंप दो

हिंदी रानी माँ सी ।


किसी राष्ट्र का

गौरव उसकी

आज़ादी है भाषा ,

संविधान के

षणयंत्रों से

हिंदी बनी तमाशा,

पढ़ती रही

ग़ुलामों वाली

भाषा दिल्ली,काशी ।


कैसा है

वह राष्ट्र न 

जिसकी अपनी बोली-बानी,

टेम्स नदी में

ढूंढ रहे हम

गंगाजल सा पानी,

गढ़ो राष्ट्र की

मूरत सुंदर

सीखो संग तराशी ।


बाल्मीकि,

तुलसी,कबीर हैं

निर्मल जल की धारा,

भारत अनगिन

बोली,बानी का

है उपवन प्यारा,

अपनी संस्कृति

और सभ्यता

कभी न होगी बासी ।

जयकृष्ण राय तुषार



Wednesday, 8 September 2021

एक देशगान-उस भारत का अभिनन्दन है

 


एक देशगान-उस भारत का अभिनन्दन है


जिसका पानी

गंगाजल है

हर पेड़ जहाँ का चन्दन है।


जिसकी झीलों में

कमल पुष्प

उस भारत का अभिनन्दन है।


जिसकी सुबहें

सोने जैसी 

दिन रजत ,ताम्र संध्याएँ हैं,

जिसके हिमगिरि

नभ,चाँद सुभग

वेदों संग परीकथाएँ हैं,

जिसके सागर में

रत्न सभी

जिसका हर उपवन नन्दन है।


जहाँ राम कृष्ण

शिव तिरुपति हैं

ऋषियों मुनियों के पुण्य धाम,

जहाँ सत्य अहिंसा

परम धर्म

जहाँ गौ को माँ का दिए नाम,

जिसमें अनगिन

ऋतुएँ, मौसम

सूरज का मणिमय स्यंदन है।

जहाँ एकलव्य

उद्दालक हैं

शिबि,कर्ण, दधीचि से दानवीर,

जहाँ व्यास पाणिनि

शंकर हैं

जहाँ बाल्मीकि,तुलसी,कबीर,

जहाँ सीता,गीता

सावित्री और

अनुसूया का वन्दन है।

कवि -जयकृष्ण राय तुषार

भारत माता


एक ग़ज़ल -वो तो सूरज है

चित्र साभार गूगल  एक ग़ज़ल -वो तो सूरज है इन चरागों को तो आँचल से बुझा दे कोई वो तो सूरज है जला देगा हवा दे कोई मैं हिमालय हूँ तो चट्टानों से ...