Wednesday, 13 October 2021

विश्व राजनेता मोदी जी

माननीय प्रधानमंत्री भारत सरकार 
श्री नरेंद्र मोदी जी 



मोदी जी अब विश्व नेता बन चुके हैं-भारत की अलग पहचान बनाने वाले प्रधानमंत्री

फिर विकास का दिया जलेगा 
तुष्टिकरण अब नहीं चलेगा 
राष्ट्रवाद के प्रहरी जागो 
गाँव -गाँव फिर कमल खिलेगा 


जयकृष्ण राय तुषार 
भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। मोदी जी का मंत्र सबका साथ सबका विकास कामयाब होगा।एक नए भारत का उदय हो रहा है।  मोदी को विश्व मीडिया,भारतीय मीडिया और भारत के बुद्धिजीवी खलनायक बनाने की कोशिश करते रहे लेकिन मोदी जी के बिना भेदभाव के काम से प्रभावित हैं।अपने संकल्प के साथ अपने मार्ग में बढ़ते गए।आज महाशक्तियां भी उनका लोहा मानने को विवश हैं।

कश्मीर समस्या,राम मंदिर और तीन तलाक कानून मोदी जी का अतुलनीय कार्य है।हमारे प्रधानमंत्री जी के कार्यकाल में ही भारतीय योग विश्व मे प्रतिष्टित हुआ है। काशी विश्व नाथ मंदिर का सुंदरीकरण,परिसर का भव्य स्वरूप ,काशी का आधुनिकीकरण आदि।

भारतीय मुस्लिम-
कुछ प्रतिशत को छोड़ दिया जाय तो भारत के मुस्लिम समाज के लोग भी अब मोदी जी के बिना भेदभाव के कार्य और योजनाओं से प्रभावित हैं।मुस्लिम विपक्ष की राजनीति से भी सजग हो गए हैं।केंद्र सरकार की तमाम योजनाएं बिना किसी भेदभाव के चल रही हैं।दंगों पर नियंत्रण हुआ शांति अमन कायम है ।विकास के लिए अमन का कायम होना जरूरी है।मुस्लिम समाज को भी चाहिए अपनी शिक्षा,जनसंख्या नियंत्रण के साथ कानून और वक्त के बदलाव को समझें ।भारत के विकास में अपना सौ प्रतिशत दें राष्ट्रपति कलाम जी को अपना आदर्श मानें।भारत के मुसलमान विश्व में अपने अच्छे कार्यों से देश की छवि को बेहतरीन बनाये।अपने समाज को भी तरक्की की राह पर ले जाएं।भारत से बेहतरीन और सुंदर राष्ट्र विश्व मे गिने चुने हैं।

योजनाएं
केंद्र सरकार ने दलालों,,विचौलियों का खेल, डिजिटल लेन  देन से बंद कर दिया ।एन0जी0 ओ0का खेल बन्द किया।निरन्तर सड़कों को बेहतर बनाने का काम गडकरी जी ने किया। ग्रामीण संपर्क मार्ग अटल जी ने शुरू किया।
जन धन खाता,किसान क्रेडिट कार्ड योजना,आवास,उज्ज्वला योजना,वन नेशन वन राशन कार्ड,किसानों को खाते में सीधे पैसा दिया गया।उपग्रहों की मदद से किसानों,मछुआरों को समय पर अलर्ट जारी किया जाने लगा। किसानों के हित के लिए हमारी केंद्र सरकार ने शानदार कार्य किया है ।देश के किसान खुशहाल हैं कुछ आन्दोलनजीवियों को छोड़कर ।

भारतीय सेना भारतीय सेना को तेजी से आधुनिक बनाने के साथ उसका मनोबल बढ़ाने का काम किया गया।भारतीय रक्षा अनुसंधान संगठन,इसरो को खुली छूट मिली देश की रक्षा जरूरतों को पूर्ण करने के लिए।दुश्मन का मनोबल सर्जिकल स्ट्राइक से तोड़ा गया।चीन का भौकाल मोदी ने खत्म कर दिया।भारत आज दुश्मनों में भय पैदा करता है।घुटने नहीं टेकता।

मोदी की प्रशंसा भारत में भले न हो विदेशों में यहां तक शत्रु राष्ट्र भी करते हैं।निरन्तर कार्य करना नई सोच को विकसित करना मोदी जी की बेहतरीन आदत है।मोदी जी ने भारतीय योग को भी विश्व मे प्रतिष्टित किया है।

आतंक -मोदी जी के पहले आतंकियों को राष्ट्रभक्त बताने का चलन विपक्ष ने वोट के लिए शुरू किया था।मोदी जी ने आतंक का अंत करने की ठान लिया और सरहद पर ही आज हमारे सुरक्षा बल काम तमाम कर दे रहे हैं।परिवार वाद लूटतंत्र पर कड़ा प्रहार मोदी राज में हुआ।




कश्मीर समस्या का समाधान,राम मंदिर ,तीन तलाक यादगार काम है जिसे पीढ़ियाँ याद रखेंगी।

माननीय प्रधानमंत्री जी आप भारत को विश्व गुरु बनाने में कामयाब हों।वन्देमातरम।

जयकृष्ण राय तुषार
उर्फ़
जयकृष्ण नारायण शर्मा
अधिवक्ता केंद्र सरकार



Tuesday, 12 October 2021

एक ग़ज़ल -उसी के क़दमों की आहट

 

चित्र साभार गूगल 

मित्रों मेरी यह ग़ज़ल भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित 'हिंदी की बेहतरीन ग़ज़लें 'साझा संग्रह में प्रकाशित है |स्मृतिशेष रवीन्द्र कालिया जी और श्री ज्ञानप्रकाश विवेक जी के सम्पादन में |

एक ग़ज़ल -उसी के क़दमों की आहट 

उसी के क़दमों की आहट सुनाई देती है 
कभी -कभार वो छत पर दिखाई देती है 

वो एक ख़त है जिसे मैं छिपाए फिरता हूँ 
जहाँ खुलूस की स्याही दिखाई देती है 

मैं उससे बोलूँ तो वो चुप रहे ख़ुदा की तरह 
मैं चुप रहूँ तो ख़ुदा की दुहाई देती है 

तमाम उम्र उँगलियाँ मैं जिसकी छू न सका 
वो चूड़ी वाले को अपनी कलाई देती है 

वो एक बच्ची खिलौनों को तोड़कर सारे 
बड़े खुलूस से माँ को सफ़ाई देती है 
जयकृष्ण राय  तुषार 
एक पुरानी पोस्ट 

श्री रवीन्द्र कालिया
पूर्व निदेशक भारतीय ज्ञानपीठ 

अपने शानदार लेखन और बेजोड़ सम्पादकीय हुनर के लिए भारतीय ज्ञानपीठ के पूर्व निदेशक और नया ज्ञानोदय के पूर्व सम्पादक रवीन्द्र कालिया हमेशा याद किये जाते रहेंगे | डॉ धर्मवीर भारतीय के साथ धर्मयुग से लम्बे समय तक जुड़े रहने के बाद इलाहाबाद में कालिया जी ने गंगा -जमुना का सम्पादन कर पत्रकारों की एक पीठी तैयार किया | ज्ञानपीठ को सचल बनाया और इलाहाबाद आकर ज्ञानपीठ ने अमरकांत को ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया |नया ज्ञानोदय के कई लोकप्रिय विशेषांक कालिया जी के संपादन में प्रकाशित हुए जिसमें युवा विशेषांक ,प्रेम महाविशेषांक और ग़ज़ल महाविशेषांक विशेष रूप से चर्चित रहे | ग़ज़ल महाविशेषांक में उर्दू हिंदी गजलकारों को साथ -साथ प्रकाशित किया गया | बाद में उर्दू की बेहतरीन ग़ज़लें किताब के रूप में हमारे सामने आ गयी |अब हिंदी की बेहतरीन ग़ज़लें पुस्तक रूप में हमारे सामने है |इस किताब के प्रधान सम्पादक रवीन्द्र कालिया और सम्पादक ज्ञानप्रकाश विवेक हैं |इस संग्रह में कुल 64 गजलकारों को सम्मलित किया गया है |अमीर खुसरो ,कबीर ,भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ,बद्रीनारायण उपध्याय प्रेमघन ,प्रताप नारायण मिश्र ,स्वामी रामतीर्थ ,लाला भगवानदीन ,मैथलीशरण गुप्त ,जयशंकर प्रसाद ,निराला ,त्रिलोचन ,शमशेरबहादुर सिंह दुष्यंत कुमार ,बलवीर सिंह रंग ,शलभ श्रीराम सिंह ,रामावतार त्यागी ,हरजीत सिंह ,अदम गोंडवी सहित तमाम आधुनिक गजलकार [मैं भी ] इस संग्रह में शामिल हैं |हम भाई ज्ञानप्रकाश विवेक ,आदरनीय रवीन्द्र कालिया और भारतीय ज्ञानपीठ के आभारी हैं ग़ज़ल विधा पर इस सुन्दर संकलन के लिए |


पुस्तक का नाम -हिन्दी की बेहतरीन ग़ज़लें 
सम्पादक -रवीन्द्र कालिया 
प्रकाशक -भारतीय ज्ञानपीठ ,नई दिल्ली 
मूल्य -रु० -180 [सजिल्द ]

चित्र साभार गूगल 


Monday, 4 October 2021

एक प्रेमगीत-अच्छा सा मौसम हो

 

चित्र साभार गूगल

एक प्रेमगीत-अच्छा सा मौसम हो


शीशे की

खिड़की में

कोई तुमसा दिखता हो।

अच्छा सा

मौसम हो

कोई कविता लिखता हो।


नाव वहीं हो

गंगा-जमुना

मिली जहाँ हँसकर,

एक अजनबी

डरकर बाहों में

जकड़े कसकर,

नज़र झुकाए

कोई हँसकर

नीचे तकता हो ।


बेमौसम

बारिश हो

भींगे फूलों पर तितली,

आँखों में

काजल,सावन हो

होठों पर कजली,

झीलों में

डूबा-उतराता

सूरज दिखता हो ।


नुक्कड़-नुक्कड़

काशी 

मुँह में पान दबाए हो,

कोई जुड़े में

फूलों का

लॉन सजाए हो,

अपना ही

श्रृंगार देखकर

दरपन हँसता हो ।

कवि-जयकृष्ण राय तुषार


चित्र साभार गूगल


चित्र साभार गूगल

Wednesday, 29 September 2021

एक गीत-उत्तर प्रदेश

 

 

काशी



यह पुण्य देवभूमि है

यह पुण्य देवभूमि है
यहाँ न कोई क्लेश है ।
ध्वज लिए विकास का
यह अग्रणी प्रदेश है
यह उत्तर प्रदेश है, यह उत्तर प्रदेश है ।

सुबहे काशी है यहीं
यहीं अवध की शाम है,
यह संत,ऋषि,विचारकों
औ ज्ञानियों का धाम है,
कला,कौशल विकास
हेतु पूँजी का निवेश है।
यह उत्तर प्रदेश है ,यह उत्तर प्रदेश है।

गंगा,जमुना,सरयू
पुण्य नदियों का प्रवाह है,
अनेकता में एकता का
प्रेम से निबाह है,
सारनाथ,कुशीनगर
बुद्ध का उपदेश है,
यह उत्तर प्रदेश है,यह उत्तर प्रदेश है।

काशी ,मथुरा,वृंदावन
गुरु गोरख यहीं मिले,
राम की अयोध्या में
अखण्ड दीप लौ जले,
परम्परा, नवीनता का
इसमें समावेश है ।
यह उत्तर प्रदेश है,यह उत्तर प्रदेश है।

चौरी-चौरा,झाँसी, मेरठ की
जमीन लाल है,
तीर्थ ये शहीदों का
ये क्रांति की मशाल है,
गौ माता का रक्षक है
ये किसानों का सुदेस है।
यह उत्तर प्रदेश है,यह उत्तर प्रदेश है।

चित्रकूट,श्रृंगवेरपुर
यहीं प्रयाग है,
विश्व पर्व कुम्भ 
इसमें धूनियों की आग है,
शिक्षा,ज्ञान,योग औ
अध्यात्म में विशेष है।
यह उत्तर प्रदेश है,यह उत्तर प्रदेश है।

रक्षक है सर्वधर्म की
माँ भारती महान है,
तुलसी के संग कबीर
औ रविदास जी का मान है,
माँ विन्ध्वासिनी की
दिव्य शक्ति भी अशेष है।
यह उत्तर प्रदेश है,यह उत्तर प्रदेश है।

स्वदेश के लिए यहाँ
बलिदान एक पर्व है,
झलकारी बाई,झाँसी
की रानी पर इसको गर्व है,
यह मंगल पांडे,बिस्मिल
और आज़ाद का प्रदेश है।
यह उत्तर प्रदेश है,यह उत्तर प्रदेश है।

यह विश्व राजनीति का
महान एक केंद्र है,
यहाँ का वीर सरहदों पे
बज्र ले महेंद्र है,
विभिन्न भाषा,बोलियाँ
विभिन्न भूषा-वेश है।
यह उत्तर प्रदेश है,यह उत्तर प्रदेश है।

बिरहा, कजरी ,आल्हा
इसके मौसमों का गीत है,
धान-पान धानी-हरे
गेहूँ स्वर्ण-पीत है,
झील-ताल खिलते कमल
खुशबुओं का देश है।
यह उत्तर प्रदेश है,यह उत्तर प्रदेश है।

राज्य का प्रतीक चिन्ह
मत्स्य और तीर है,
वृक्ष है अशोक, पुष्प
टेसू ज्यों अबीर है,
स्त्रियों के मान और
सम्मान का आदेश है।
यह उत्तर प्रदेश है,यह उत्तर प्रदेश है।

कवि जयकृष्ण राय तुषार




कवि-जयकृष्ण राय तुषार


Tuesday, 21 September 2021

एक गीत-चाँदनी निहारेंगे

 

चित्र साभार गूगल

एक गीत-चाँदनी निहारेंगे


रंग चढ़े

मेहँदी के

मोम सी उँगलियाँ ।

धानों की

मेड़ों पर

मेघ औ बिजलियाँ ।


खुले हुए

जूड़े और

बच्चों के बस्ते,

हँसकर के

खिड़की से

सूर्य को नमस्ते,

फूलों का

माथ चूम

उड़ रहीं तितलियाँ ।


 ढूँढ रहे

अर्थ सुबह

रातों के सपने,

रखकर

ताज़ा गुलाब

पत्र लिखा किसने,

आटे की

गोली सब

खा गयीं मछलियाँ ।


आहट

दीवाली की

किस्से रंगोली के,

दिन लौटे

दिए और

पान-फूल रोली के

चाँदनी

निहारेंगे छत

आँगन-गलियाँ ।



Thursday, 16 September 2021

एक गीत-हिंदी रानी माँ सी

 


एक गीत-हिंदी रानी माँ सी


पखवाड़ा भर

पूजनीय है

बाकी दिन है दासी ।

सिंहासन अब

उसे सौंप दो

हिंदी रानी माँ सी ।


किसी राष्ट्र का

गौरव उसकी

आज़ादी है भाषा ,

संविधान के

षणयंत्रों से

हिंदी बनी तमाशा,

पढ़ती रही

ग़ुलामों वाली

भाषा दिल्ली,काशी ।


कैसा है

वह राष्ट्र न 

जिसकी अपनी बोली-बानी,

टेम्स नदी में

ढूंढ रहे हम

गंगाजल सा पानी,

गढ़ो राष्ट्र की

मूरत सुंदर

सीखो संग तराशी ।


बाल्मीकि,

तुलसी,कबीर हैं

निर्मल जल की धारा,

भारत अनगिन

बोली,बानी का

है उपवन प्यारा,

अपनी संस्कृति

और सभ्यता

कभी न होगी बासी ।

जयकृष्ण राय तुषार



Wednesday, 8 September 2021

एक देशगान-उस भारत का अभिनन्दन है

 


एक देशगान-उस भारत का अभिनन्दन है


जिसका पानी

गंगाजल है

हर पेड़ जहाँ का चन्दन है।


जिसकी झीलों में

कमल पुष्प

उस भारत का अभिनन्दन है।


जिसकी सुबहें

सोने जैसी 

दिन रजत ,ताम्र संध्याएँ हैं,

जिसके हिमगिरि

नभ,चाँद सुभग

वेदों संग परीकथाएँ हैं,

जिसके सागर में

रत्न सभी

जिसका हर उपवन नन्दन है।


जहाँ राम कृष्ण

शिव तिरुपति हैं

ऋषियों मुनियों के पुण्य धाम,

जहाँ सत्य अहिंसा

परम धर्म

जहाँ गौ को माँ का दिए नाम,

जिसमें अनगिन

ऋतुएँ, मौसम

सूरज का मणिमय स्यंदन है।

जहाँ एकलव्य

उद्दालक हैं

शिबि,कर्ण, दधीचि से दानवीर,

जहाँ व्यास पाणिनि

शंकर हैं

जहाँ बाल्मीकि,तुलसी,कबीर,

जहाँ सीता,गीता

सावित्री और

अनुसूया का वन्दन है।

कवि -जयकृष्ण राय तुषार

भारत माता


Wednesday, 1 September 2021

एक सामयिक ग़ज़ल-बम औ बंदूक से दुनिया है परेशान मियां

 


एक सियासी ग़ज़ल मौजूदा स्थिति पर


मुल्क को मुल्क बनाते हैं बस इन्सान मियां

बम औ बंदूक से दुनिया है परेशान मियां


नाम हमदर्दी का साज़िश है बड़े लोगों की

बन्द बोतल से निकल आये हैं शैतान मियां


औरतों,बच्चों को क़ातिल के हवाले करके

अपने ही मुल्क से धोखा किये अफ़गान मियां


ख़्वाब कश्मीर का अब देखना छोड़ो प्यारे

सन इकहत्तर को नहीं भूलना इमरान मियां


हम अहिंसा के पुजारी है मगर याद रहे

है निहत्था नहीं कोई मेरा भगवान मियां



Monday, 30 August 2021

एक गीत सामयिक-फिर बनो योगेश्वर कृष्ण

 


एक सामयिक गीत

फिर बनो योगेश्वर कृष्ण


फिर बनो

योगेश्वर कृष्ण

उठो हे पार्थ वीर ।

हे सूर्य वंश के

राम

उठा कोदण्ड- तीर ।


जल रहा

शरीअत की

भठ्ठी में लोकतंत्र,

अब भारत

ढूंढे विश्व-

शान्ति का नया मन्त्र,

भर गयी

राक्षसी 

गन्धों से पावन समीर।


इन महाशक्तियों

के प्रतिनिधि

अन्धे, बहरे,

ये सभी

दशानन हैं

इनके नकली चेहरे,

सब अपने

अपने स्वार्थ

के लिए हैं अधीर।


इतिहास

लिखेगा कैसे

इस युग को महान,

नरभक्षी

रक्तपिपासु

घूमते तालिबान,

रावलपिंडी

दे रही

इन्हें मुग़लई खीर ।



Monday, 23 August 2021

एक गीत-रख गया मौसम सुबह अंगार फूलों पर

 


एक गीत-रख गया मौसम सुबह अंगार फूलों पर


रख गया

मौसम 

सुबह अंगार फूलों पर ।


वक्त पर

लम्बे-घने

तरु भी हुए बौने,

रेत 

नदियों में

पियासे खड़े मृगछौने,

ताक में

अजगर

शिकारी नदी कूलों पर ।


सूर्य भी

छिपने लगा 

है बादलों के घर,

हो गए हैं

सभ्यता के

आज कातर स्वर,

घोसलों पर,

चील के 

कब्जे बबूलों पर ।


हो गयी

दुनिया तमाशा

वक्त भी बुज़दिल,

अब अहिंसा से

विजय का

पथ हुआ मुश्किल,

इस सदी में

कौन कायम

है उसूलों पर ।

कवि जयकृष्ण राय तुषार

चित्र साभार गूगल


एक देशगान-फिर शांति अचम्भित,विस्मित है

 


देशगान-फिर शांति अचंभित,विस्मित है


जागो भारत के

भरतपुत्र

सरहद पर कर दो शंखनाद ।

फिर शांति 

अचम्भित, विस्मित है

फिर मानवता के घर विषाद ।


हो गयी 

अहिंसा खण्ड-खण्ड

हे बामियान के बुद्ध देख,

स्त्री,बच्चों 

लाचारों से

अब कापुरुषों का युद्ध देख,

बन शुंग,शिवाजी

गोविन्द सिंह,रण में

दाहिर को करो याद ।


बीजिंग,लाहौर

कराची का फिर

आँख मिचौनी खेल शुरू,

घर में सोए

गद्दारों का

षणयंत्र शत्रु से मेल शुरू,

इस बार 

शत्रु का नाम मिटा

हो अंतरिक्ष तक सिंहनाद।


वीटो वाले

दुबके घर में

इनको पसंद कोलाहल है,

नेतृत्व बने

अब महाकाल

दुनिया विष उदधि हलाहल है,

असुरों पर

फेंकों अब त्रिशूल

ताण्डव हो डमरू का निनाद ।

कवि-जयकृष्ण राय तुषार

सभी चित्र साभार गूगल


Wednesday, 18 August 2021

एक सांकेतिक गीत-वह राम विजय ही पाएगा

 


एक सामयिक सांकेतिक गीत-वह राम विजय ही पाएगा


रावण कितना

बलशाली हो

हर युग में मारा जाएगा ।

जिसका

चरित्र उज्ज्वल होगा

वह स्वयं राम हो जाएगा ।


सिंहासन का

परित्याग किये,

अपहरण राम कब करते हैं,

केवट से

विनती करके ही

गंगा के पार उतरते हैं,

जो सबका

आँसू पोछेगा

वह राम विजय ही पाएगा ।


स्त्री,बच्चों पर

जुल्म करे जो

कायर ,नहीं प्रतापी है,

जो खड़ा 

समर्थन में इनके

वह युगों-युगों का पापी है,

मुट्ठी भर

सूरज का प्रकाश 

मीलों तक तम को खाएगा ।


वह नहीं

राष्ट्र का नायक है

जो रण में पीठ दिखाता है,

जो मरे 

राष्ट्र की रक्षा में

युग-युग तक पूजा जाता है,

तूफ़ान 

गिरा दे पेड़ भले

पर्वत से क्या टकराएगा ।


हर भाँति

प्रजा के मंगल

के खातिर होता सिंहासन है,

कुछ दूर

हमारी सरहद से

धृतराष्ट्र,शकुनि,दुःशासन है,

फिर चीरहरण

से महाशक्तियों

का मस्तक झुक जाएगा ।


कवि -जयकृष्ण राय तुषार

Saturday, 14 August 2021

 

साहित्य मनीषी और आज़ादी के महानायक
पुरुषोत्तम दास टंडन

उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान को समर्पित एक गीत


माँ भारती का गर्व है ये भाषा का विहान है

यह अवध की शान है ये हिंदी संस्थान है 


यह काव्य की उपासना है मन्दिरों की आरती

श्रेष्ठ हैं सम्मान सब शिखर है भारत भारती

यह भाषा ,छंद,व्याकरण,विमर्श को सँवारती

परंपरा के साथ धर्म ,ज्ञान और विज्ञान है

यह अवध की शान है यह हिंदी संस्थान है ।


पुरुषोत्तम दास टण्डन जी के स्वप्न का शिखर यही

हिंदी के साथ-साथ सभी बोलियों का घर यही

भक्ति,रीतिकाल और वर्तमान स्वर यही

यह हिंदी राष्ट्र एकता की प्रेरणा महान है

यह अवध की शान है ये हिंदी संस्थान है


भाषा यह गूँजी विश्व में अटल जी का प्रयास है

इस हिंदी पुष्प गन्ध का अनन्त में सुवास है

परिचर्चा,खंडकाव्य शोधग्रन्थ का लिबास है

इस राष्ट्र के गौरव का उसकी सभ्यता का गान है

यह अवध की शान है ये हिंदी संस्थान है


कवि-जयकृष्ण राय तुषार



साहित्य मनीषी और आज़ादी के महानायक पुरुषोत्तमदास टंडन जी और उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ।चित्र साभार गूगल

Friday, 13 August 2021

एक गीत-बाढ़ की विभीषिका पर /पानी में डूब गए पेड़ हरसिंगार के

 


एक गीत -बाढ़ की विभीषिका पर 


डूब गए

पानी में

पेड़ हरसिंगार के।

स्वप्न गिरे

औंधे मुँह

पूजा और प्यार के ।


द्वार-द्वार

गंगा और

जमुना की लहरें हैं,

बस्ती में

नावें हैं

मदद और पहरे हैं,

कजली चुप

फीके रंग

सावनी फुहार के ।


नदियों के

पेटे में

एक नया प्रयाग है,

चूल्हों में

पानी है

बुझी हुई आग है,

मछली सा

तैर रहे

आदमी कछार के ।


जिनके 

घर-बार

हुए वो भी बंजारों से,

खतरा है

नदियों के

टूटते किनारों से,

चाँदनियों 

के चेहरे

हैं बिना सिंगार के ।

कवि-जयकृष्ण राय तुषार


चित्र साभार गूगल


Tuesday, 10 August 2021

एक आस्था का गीत लोकभाषा में राम कै बखान करै तुलसी कै बानी

 


एक आस्था का गीत-लोकभाषा में

सरयू माँ तोहरे संग राम कै कहानी


युग-युग तक उमर बढै

घटै नहीं पानी ।

सरयू माँ तोहरे संग

राम कै कहानी ।


राम,लखन सबके

तू गोद में खेलवलू 

जनकसुता सीता कै

माँग भी सजवलू

राम कै बखान

करै तुलसी कै बानी ।


रक्खे लू खबर मइया

सबही के प्यास कै

कइसे तू दृश्य देखि

जियलू बनवास कै

जोगी औ जोगन

होइ गएन राजा रानी।


पंचवटी,ऋष्यमूक

पग-पग भटकावै

भवसागर पार करै

जे दरसन पावै

प्रभु कै प्रसाद 

कन्दमूल और पानी ।


सबरी कै भक्ति भाव

देखि के अघइलें

राम जी कै हनुमत

सुग्रीव सखा भइलैं 

सोने के लंका कै

मिटल सब निशानी।


साधु,संत औ गृहस्थ

तोहरे तट आवै

आपन सुख-दुःख

तोहरे लहर से सुनावै

तोहईं से अन-धन ,वन

खेत औ किसानी ।

कवि-जयकृष्ण राय तुषार

चित्र साभार गूगल सरयू नदी


Saturday, 7 August 2021

एक गीत-जंगल के फूल कहाँ जूड़े में खिलते हैं

 

चित्र साभार गूगल

एक गीत-जंगल के फूल कहाँ जूड़े में खिलते हैं


धूप-छाँह 

बारिश 

हर मौसम में खिलते हैं ।

जंगल के

फूल कहाँ

जूड़े में मिलते हैं ।


इनको

झुलसाते हैं

आँधी, लू और आग,

उज्जयिनी

बोधगया

जाने ये क्या प्रयाग,

गर्द भरी

आँखों को

जब-तब ये मलते हैं ।


प्यास लगी

तो इनको

नदियों के घाट मिले,

गमले के

फूलों सा

कहाँ ठाट-बाट मिले,

आसपास

इनके कब

सगुन दिए जलते हैं ।


दूर प्रेम पत्रों से

वक्त की 

किताबों से,

भरे हुए

ख़्वाब सभी

शहर के गुलाबों से,

मौसम को

गंधों के 

कुर्ते ये सिलते हैं ।

कवि -जयकृष्ण राय तुषार

चित्र साभार गूगल


Tuesday, 3 August 2021

एक गीत-हरे धान के इन फूलों में

 

चित्र साभार गूगल



एक गीत-हरे धान के इन फूलों में


हरे धान के

इन फूलों में

चावल होंगे काले-गोरे ।


बादल-बिजली

धूप-छाँह में

हँसते हैं,बतियाते हैं ये,

चिकनी,भूरी

करइल,दोमट

सबमें गीत सुनाते हैं ये,

बच्चे उड़ते

पंख लगाकर

दूध -भात के देख कटोरे ।


कभी मूँगारी

हो जाते हैं कभी

जलप्रलय में बहते हैं,

पक जाने पर

रंग सुनहरे

लिए हमेशा ये रहते हैं,

इनकी आमद से

भर जाते कितने

कोठिला,कितने बोरे ।


मजदूरिन

होठों की लाली

इनसे ही कंगन औ बाली,

चिरई -चुनमुन

कजरी गैया

सबकी भरती इनसे थाली,

अक्षत,तिलक

यजन की वेदी

रस्म निभाते चावल कोरे ।

कवि-जयकृष्ण राय तुषार

चित्र साभार गूगल


Saturday, 31 July 2021

 

चित्र साभार गूगल


एक प्रेम गीत-

खुशबुओं की शाम कोई


हमें तो

फूल,तितलियों

की याद आती रही ।

वो घर

सजाने में

हर ग़म-खुशी भुलाती रही ।


उसे मिली ही

नहीं खुशबुओं 

की शाम कोई,


बदलती

ऋतुएँ भी

देती कहाँ आराम कोई,

हमारी भूख

हमेशा ही

तिलमिलाती रही ।


वो चाँदनी है

मगर 

बादलों में घिरती रही,

हरेक 

झील,नदी 

मछलियों सी तिरती रही,

कोई भी

रस्म हो वो

रस्म को निभाती रही ।


कभी न थकती

न बुझती

है एक जलता दिया,

हुनर इस

सृष्टि ने औरत को

जाने  कितना दिया,

सियाह 

रातों को

तारों से जगमगाती रही।


वो भक्ति

प्रेम की बलिदान 

की कथाओं में है,

तमाम गीत

ग़ज़ल ,मन्त्र

औ ऋचाओं में है।

युगों-युगों से

सुरों को भी 

वो सजाती रही ।

कवि-जयकृष्ण राय तुषार

चित्र साभार गूगल


चित्र साभार गूगल

Tuesday, 27 July 2021

एक गीत -भारत की नारी

 

कृष्ण भक्त मीराबाई

एक गीत-भारत की नारी


हर युग में

भारत की नारी

शिखरों को चूमा करती है।

वह दीप शिखा

बनकर जीवन पथ

का सारा तम हरती है ।


लिखती है

गीत 'सुभद्रा' बन

रण में झाँसी की रानी है,

'भारती'सरीखी

विदुषी वह

अनुसूया जैसी दानी है,

जब भक्ति

प्रेम का भाव उठे

मीरा कब विष से डरती है ।


सावित्री

सीता माता ने

सुंदर पति धर्म निभाया है,

यशगान

नारियों का अनुपम

वेदों,ग्रन्थों ने गाया है,

सब भार

उठाये जीवों का

स्त्री ही माता धरती है।


कल्पना चावला बन

तारों में पँख

लगाकर उड़ती है,

विजयी मुद्रा में

स्वर्ण पदक लेकर

ही पीछे मुड़ती है,

इसरो में बैठे

चन्द्रयान का

स्वप्न सजाया करती है ।


गंगा,यमुना

नर्मदा और

सरयू जीवन की रेखा है,

इस रम्य सृष्टि में

हम सबने

इनकी महिमा को देखा है,

हर नदी

हरापन लाती है

खाली सागर को भरती है ।

कवि-जयकृष्ण राय तुषार

महारानी लक्ष्मीबाई


Sunday, 25 July 2021

एक गीत-महीयसी महादेवी वर्मा के लिए

महीयसी महादेवी वर्मा


एक गीत-

महीयसी महादेवी वर्मा को समर्पित


आधुनिक मीरा

महादेवी थीं

छायावाद की ।

काव्य संगम

की सरस्वती

वह इलाहाबाद की।


गीत,निबन्ध

कहानियों से

सजीं सुन्दर दीपमाला,

घन तिमिर में

चाँदनी बनकर

रहीं देती उजाला,

'सप्तपर्णा'

कृति अनूठी

काव्य के अनुवाद की ।


सदा चिन्ता

स्त्रियों के

मान और सम्मान की,

वह थीं

शुभचिंतक,निराला

पंत से दिनमान की,

दार्शनिक

चिंतन,कभी

कविता लिखीं अवसाद की।


मोर,गिल्लू 

और गौरा से

अनूठा प्यार उनका,

खग-विहग

कुछ फूल,तितली

बन गए परिवार उनका,

जिन्दगी भर

रही कोशिश

प्रकृति से संवाद की ।


कवि-जयकृष्ण राय तुषार

विश्व राजनेता मोदी जी

माननीय प्रधानमंत्री भारत सरकार  श्री नरेंद्र मोदी जी  मोदी जी अब विश्व नेता बन चुके हैं-भारत की अलग पहचान बनाने वाले प्रधानमंत्री फिर विकास ...