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Friday, 14 August 2026

आज़ादी की पूर्व संध्या पर एक देशगान -आज़ादी की इस मशाल को

 

झाँसी की रानी 

भारत माता 


आज़ादी की पूर्व संध्या पर एक पुराना देशगान 


जय-जय प्यारे देश हमारे

जय-जय हिन्दुस्तान।

आजादी की इस मशाल को

छू न सके तूफान।


पूरब से पश्चिम तक

तेरी गौरव गाथा है,

दक्षिण में सागर

उत्तर में सागरमाथा है,

तेरे कण-कण में लिक्खा है

बापू का बलिदान।


तुझमें सतलज कावेरी

गंगा का पानी है,

तुझमें नानक तुलसी और

मीरा की बानी है,

तेरी मिट्टी की खुशबू में

हैं दादू , रसखान।


तक्षशिला नालंदा

तेरी पुराकथाएं हैं,

यहां बाइबिल गुरुग्रन्थ

और वेदऋचाएं हैं,

हम भटकें तो राह दिखाते

हैं गीता-कुरआन।


हँसता है मधुमास

यहां पर सावन गाता है,

रंग-बिरंगे धर्मों का

यह सुन्दर छाता है,

हर मौसम में यहां

गूँजती है वंशी की तान।


हम दुनिया की राहों में

बस फूल सजाते हैं,

सत्य अहिंसा विश्व शांति के

दीप जलाते हैं,

वीर तपस्वी बलिदानी

बच्चों की तू है खान।


कवि /गीतकार 

जयकृष्ण राय तुषार

भारत की संस्कृति 

सभी चित्र साभार गूगल 

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