![]() |
| चित्र -साभार गूगल |
एक प्रेम गीत -जिसे देखा चाँद था या ----
मन्दिरों की
सीढ़ियों पर
आ रहा है याद कोई |
जिसे देखा
चाँद था या
चाँद का अनुवाद कोई |
आरती के
दिये जैसी एक
जोगन सांध्य बेला ,
खिलखिलाते
फूल के वन
और इक भौंरा अकेला ,
मौन सी
हर बाँसुरी पर
लिख गया अनुनाद कोई |
दौड़कर ठिठके
हिरन से दिन
हुआ मौसम सुहाना ,
नयन
आखेटक सरीखे
साधते अपना निशाना ,
बिना स्याही
कलम ,चिट्ठी
कर गया सम्वाद कोई |
कवि -जयकृष्ण राय तुषार
कवि -जयकृष्ण राय तुषार
![]() |
| चित्र -साभार गूगल |

