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Friday, 13 March 2020

एक प्रेम गीत -जिसे देखा चाँद था या चाँद का अनुवाद कोई


चित्र -साभार गूगल 



एक प्रेम गीत -जिसे देखा चाँद था या ----

मन्दिरों की 
सीढ़ियों पर 
आ रहा है याद कोई |
जिसे देखा 
चाँद था या 
चाँद का अनुवाद कोई |

आरती के 
दिये  जैसी एक 
जोगन सांध्य बेला ,
खिलखिलाते 
फूल के वन 
और इक भौंरा अकेला ,
मौन सी 
हर बाँसुरी पर 
लिख गया अनुनाद कोई |

दौड़कर ठिठके 
हिरन से दिन 
हुआ मौसम सुहाना ,
नयन 
आखेटक सरीखे 
साधते अपना निशाना ,
बिना स्याही 
कलम ,चिट्ठी 
कर गया सम्वाद कोई |

कवि -जयकृष्ण राय तुषार 

चित्र -साभार गूगल 

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