Showing posts with label एक गीत-नए वर्ष की नई सुबह अब. Show all posts
Showing posts with label एक गीत-नए वर्ष की नई सुबह अब. Show all posts

Wednesday, 25 November 2020

एक गीत-नए वर्ष की नई सुबह अब साँसो पर पहरे मत लाना |


 

एक गीत-नए वर्ष की नई सुबह 

अब साँसों पर पहरे मत लाना

नए वर्ष की 

नई सुबह 

अब साँसो पर पहरे मत लाना |

चुभन सुई की

सह लेंगे पर

दर्द बहुत गहरे मत लाना ।


सारे रंग -गंध

फूलों के

बच्चों को बाँटना तितलियों ।

फिर वसंत के

गीत सुनाना

वंशी लेकर सूनी गलियों,

बीता साल

भुला देंगे हम

अब मौसम बहरे मत लाना ।


तारीख़ें शुभ

मंगल दिन हो

झीलों में अमृत सा जल हो,

जीवन की गति

हिरनी जैसी

वातायन की धुन्ध विरल हो,

प्रकृति तोड़ दे

घुँघरू अपने

ऐसे अब खतरे मत लाना ।


कण-कण में हो

रंग-रंगोली

दरपन में श्रृंगार भरा हो,

कविताओं के दिन

फिर लौटें 

स्वर कोई भी नहीं डरा हो ,

मीठे फल ताजा

पेड़ों से लाना

पर कुतरे मत लाना ।


कवि -जयकृष्ण राय तुषार 



कवि-चित्र -साभार गूगल 




एक गीत -जीता भारत देश हमारा जीत गया बंगाल

  नेताजी सुभाष चंद्र बोस  एक गीत -जीता भारत देश हमारा जीत गया बंगाल  गुरुदेव रविन्द्रनाथ ठाकुर  जीता भारत देश हमारा  जीत गया बंगाल. नरभक्षी ...