| चित्र साभार गूगल |
एक ग़ज़ल-उससे मिलने का बहाना है ग़ज़ल
कुछ हक़ीकत कुछ फ़साना है ग़ज़ल
धूप में इक शामियाना है ग़ज़ल
प्यास होठों की इबादत इश्क की
दिल के लफ़्ज़ों का खज़ाना है ग़ज़ल
चाँद, सूरज,आसमाँ कुछ भी नहीं
उससे मिलने का बहाना है ग़ज़ल
धूप,साया,खुशबुएँ, बारिश,हवा
मौसमों का भी ठिकाना है ग़ज़ल
दर्द,तनहाई, ग़रीबी, मुफ़लिसी
सरफ़रोशी का तराना है ग़ज़ल
कवि जयकृष्ण राय तुषार
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