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| चित्र -गूगल सर्च इंजन से साभार |
भक्ति भाव से प्रेम भाव से
हम करते गुणगान |
तुम्हारा हे शकंर भगवान
तुम्हारी जय शंकर भगवान |
तुम यह जग माया उपजाये
तेरी महिमा सुर नर गाये ,
तू भक्तों का ताप मिटाये ,
नीलकंठ विष पी कहलाये
तुम ही हो असीम भव सागर
तुम नाविक जलयान |
तेरी संगिनी सती भवानी
तेरे वाहन नंदी ज्ञानी ,
तेरे डमरू की डिम डिम से
निकलीं उमा ,रमा ,ब्रह्मानी ,
तू ही जग का अंधकार प्रभु
तू ही उज्जवल ज्ञान |
तीन लोक में काशी न्यारी
तुमको प्रिय भोले भंडारी ,
भूत प्रेत बेताल के संगी ,
हें भोले बाबा अड् भंगी ,
तेरी महिमा जान न पाये
चारो वेद पुराण |
तुम्ही प्रलय हो तुम्ही पवन हो
तुम यह धरती नीलगगन हो ,
जड़ चेतन के भाग्य विधाता
तुम्ही काल के असली ज्ञाता ,
तुम्ही पंचमुख महाकाल हो

