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Wednesday, 2 March 2011

आस्था के स्वर -संदर्भ -महाशिवरात्रि

चित्र -गूगल सर्च इंजन से साभार
महाशिवरात्रि पर विशेष रचना 

भक्ति भाव से प्रेम भाव से 
हम करते गुणगान    |
तुम्हारा हे शकंर भगवान 
तुम्हारी जय शंकर भगवान |

तुम यह जग माया उपजाये 
तेरी महिमा सुर नर गाये ,
तू भक्तों का ताप मिटाये ,
नीलकंठ विष पी कहलाये 

तुम ही हो असीम भव सागर 
तुम नाविक जलयान  |

तेरी संगिनी सती भवानी 
तेरे वाहन नंदी ज्ञानी ,
तेरे डमरू की डिम डिम से 
निकलीं उमा ,रमा ,ब्रह्मानी ,

तू ही जग का अंधकार प्रभु 
तू ही उज्जवल ज्ञान |

तीन लोक में काशी न्यारी 
तुमको प्रिय भोले भंडारी ,
भूत प्रेत बेताल के संगी ,
हें भोले बाबा अड् भंगी ,

तेरी महिमा जान न पाये 
चारो वेद पुराण  |

तुम्ही प्रलय हो तुम्ही पवन हो 
तुम यह धरती नीलगगन हो ,
जड़ चेतन के भाग्य विधाता 
तुम्ही काल के असली ज्ञाता ,

तुम्ही पंचमुख महाकाल हो 
तुम्ही सूर्य हनुमान |


बनारस -चित्र गूगल से साभार 

एक गीत -मोगरे का फूल जूड़े में

  चित्र साभार गूगल  एक गीत -मोगरे का फूल जूड़े में  मोगरे का फूल  जूड़े में  सजाती है.  नदी हँसकर  ज़िन्दगी का   गाती  है. धूप -छाँही  सफऱ में ...