Monday, 29 June 2020

एक गीत -मौसम में खुशबू है इतर और पान की



चित्र -साभार गूगल 

एक गीत -मौसम में खुशबू है इतर और पान की 

हाथों में 
मेहँदी है 
साड़ी शिफ़ान की |
मौसम में 
खुशबू है 
इतर और पान की |

रस्ते में
फिसलन है 
दिन है आषाढ़ का ,
नदियों का 
मंसूबा है 
शायद बाढ़ का ,
खेत में 
कछारों में 
हरियाली धान की |

घोंसले
बया के हैं
पेड़ हैं बबूलों के,
तन-मन
सब भींग रहे
वन,उपवन,फूलों के,
नाचते 
मयूरों से 
शोभा सिवान की |

हरे पेड़ 
उलझे हैं 
बिजली के तारों से ,
खिड़की के 
पाट खुले 
पुरवा बौछारों से ,

सोने की 
बाली फिर 
गुम दायें कान की |

गुड़हल के 
लाल ,पीत- 
फूल हैं कनेरों के ,
मेघों के 
घेरे में 
सूर्य हैं सवेरों के ,
रह -रह के 
बजती है 
पायल सीवान की |
कवि -जयकृष्ण राय तुषार 
चित्र -साभार गूगल 



Saturday, 27 June 2020

एक गीत -हिन्दुस्तानी एकेडमी के लिए

हिन्दुस्तानी एकेडमी प्रयागराज के अध्यक्ष
डॉ ० उदय प्रताप सिंह  बालकृष्ण भट्ट की मूर्ति का अनावरण करते हुए 
परिचय -हिन्दुस्तानी एकेडमी प्रयागराज की स्थापना आज़ादी के पूर्व १९२७ में हुई थी |तत्कालीन मंत्री राय राजेश्वर बली के समय में | इसके पूर्व अध्यक्षों में बली साहब सप्रू जैसे विद्वान थे |इस संस्था में हिंदी उर्दू दोनों भाषाओँ को बढ़ावा मिला और अनेक महत्वपूर्ण ग्रन्थ प्रकाशित हुए |वर्तमान अध्यक्ष डॉ ० उदय प्रताप सिंह [आज़मगढ़ ] जी ने साहित्य के लिए कई पुरष्कार माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश से सृजित कराये जिसमें सबसे बड़ा पुरष्कार गुरु गोरखनाथ नामित पुरष्कार ५ लाख राशि का है |तुलसी ,फ़िराक ,दिवेदी ,बनादास ,भारतेंदु आदि अन्य पुरष्कारों के साथ २५ हजार का नवलेखन पुरष्कार भी है |हिन्दुस्तानी एकेडमी की त्रैमासिक पत्रिका भी है जो अनगिनत महत्वपूर्ण साहित्य पर विशेषांक निकाल चुकी है | वर्तमान अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह स्वयं एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी लेखक हैं उनकी कई महत्वपूर्ण कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं | डॉ उदय प्रताप जी के सद्प्रयास से एकेडमी कई महत्वपूर्ण कार्य करने में सफल हुई |बालकृष्ण भट्ट जी की मूर्ति का अनावरण भी उन कार्यों में से एक है |मैं वर्तमान अध्यक्ष के उत्तम स्वास्थ्य और शतायु होने की मंगल कामना करता हूँ |
एक गीत -
हिन्दुस्तानी एकेडमी प्रयागराज को समर्पित 


हिंदी, उर्दू ,लोकरंग यह 
सबकी बोली बानी है |
गंगा, जमुना, सरस्वती का
संगम हिन्दुस्तानी है |

गुरु गोरख के नाम यहाँ पर 
पुरस्कार अभिनन्दन है ,
शोध प्रकाशन ,मौलिक लेखन 
विद्वानों का वन्दन है ,
सन सत्ताइस में जन्मी 
यह भाषाओँ की रानी है |

आज़ादी को देखा इसने 
देखा पन्त ,निराला को ,
बालकृष्ण ,अकबर ,फ़िराक 
औ बच्चन की मधुशाला को ,
बली ,महादेवी ,सप्रू यह
परिमल की अगवानी है |

उदय प्रताप सिंह  के प्रयास से 
 तेवर इसका बदला है ,
उदयाचल से नया सूर्य फिर 
नये रंग में निकला है 
ज्ञान दीप यह जले हमेशा
यह मिट्टी बलिदानी है ।

तुलसी और कबीर हमारी 
संस्कृतियों के नायक हैं ,
निर्गुण ,सगुण रूप में दोनों 
रामकथा के गायक हैं ,
भोजपुरी ,अवधी ,बुन्देली 
ब्रज की यह दीवानी है 

भरद्वाज ऋषि  ,योगी जी
का इससे पावन नाता है ,
राम वनगमन मार्ग यही जो 
चित्रकूट को जाता है ,
श्रृंगवेरपुर ,कुम्भ कथाएँ 
यहाँ हर्ष सा दानी है |

विविध विधाएं परिचर्चाएं 
ग्रन्थों का उपहार यहाँ ,
ज्ञानी ,गुरुजन ,शोध सहायक 
सबको मिलता प्यार यहाँ 
विद्वानों की पुण्य भूमि यह 
गीतों भरी कहानी है |

कवि -जयकृष्ण राय तुषार 

माननीय मुख्यमंत्री जी के साथ उदय प्रताप जी और प्रोफ़ेसर सदानन्द प्रसाद गुप्त 

Saturday, 20 June 2020

एक देशगान -राणा के संग भारत होगा अबकी हल्दीघाटी में



जयहिंद ! जय भारत ! जय जवान !



एक देशगान -
राणा के संग भारत होगा अबकी हल्दीघाटी में 

आँखों में 
हो स्वप्न स्वदेशी 
हाथों में हथियार रहे |
जितना 
अपनी माँ से उतना 
मातृभूमि से प्यार रहे |

सबसे ऊँची 
मूर्ति उसी की 
जो सैनिक ,बलिदानी हो ,
उसके खातिर 
प्रथम पुष्प हो 
सब नदियों का पानी हो ,

कविता 
उसके लिए हमारी 
वैदिक मंत्रोच्चार रहे |

गजनी ,गोरी ,
और सिकन्दर  
भारत माँ से हारे हैं ,,
सवा अरब 
बलवान हमारे 
ड्रैगन को ललकारे हैं ,

बाएं हाथ 
शीश दुश्मन का 
दायें में तलवार रहे |

गीता ,ग्रन्थ 
कुरान ,बाइबिल 
पूजनीय इस माटी में ,
राणा के संग 
भारत होगा 
अबकी हल्दीघाटी में ,

शांति विश्व को 
भारत देगा 
सुखमय यह संसार रहे |

कवि -जयकृष्ण राय तुषार 
शौर्य और बलिदान की गाथा जिनके रक्त में है भारत के वीर सपूत 

Wednesday, 17 June 2020

एक गीत -काँटों का मौसम फूलों का खिलना मुश्किल है



चित्र -साभार गूगल 

एक गीत -
काँटों का मौसम फूलों का खिलना मुश्किल है 


रिश्तों में 
दो गज की दूरी
मिलना मुश्किल है |
काँटों का 
मौसम फूलों
का खिलना मुश्किल है |

खत्म हुए 
सम्वाद शहर के 
रिश्ते गाँवों के ,
क़िस्से 
सुनते रहे 
राजपथ दुखते पाँवों के ,
इतना 
सूरज थका 
शाम को ढलना मुश्किल है |

कभी हाथ 
में हाथ तुम्हारा 
लेकर चलते थे ,
कुछ होंठों 
कुछ आँखों से 
सम्वाद निकलते थे ,
भूल गये 
चाँदनी 
रात को मिलना मुश्किल है |

रोशनियों 
की करो प्रतीक्षा 
हार नहीं अच्छी ,
जीवन के 
संघर्षों से 
तकरार नहीं अच्छी ,
बिना आँच 
के हिम रिश्तों 
का गलना मुश्किल है |

कवि -जयकृष्ण राय तुषार 
चित्र -साभार गूगल 


एक देशगान -अब पार्थ जयद्रथ को रण में छलना होगा



एक देशगान -
अब पार्थ जयद्रथ को रण में छलना होगा 


अब समय 
पूर्व इस 
सूरज को ढलना होगा |
हे पार्थ 
जयद्रथ को 
रण में छलना होगा |

कब थकी 
युद्ध की नीति 
हिमालय बदलेगा ,
अब हिन्द 
महासागर 
का पानी उबलेगा ,
दुश्मन के 
सीने पर 
चढ़कर चलना होगा |

उठ काली 
बन विकराल 
उठो ब्रह्मोस ,सुदर्शन ,
फिर प्रलय 
करो हे महाकाल 
कर तांडव नर्तन ,
अब एक एक 
हिमखंड 
तुम्हें गलना होगा |

अब वीर
जवानों
रणभेरी तैयार करो ,
बन शुंग 
शिवाजी ,राणा 
अरि पर वार करो 
दुनिया को 
भारत के 
पीछे चलना होगा |

कवि -जयकृष्ण राय तुषार 

विश्व राजनेता मोदी जी

माननीय प्रधानमंत्री भारत सरकार  श्री नरेंद्र मोदी जी  मोदी जी अब विश्व नेता बन चुके हैं-भारत की अलग पहचान बनाने वाले प्रधानमंत्री फिर विकास ...