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Monday, 15 August 2011

एक गीत -हे बापू हमें क्षमा करना

चित्र -गूगल सर्च इंजन से साभार 
हे बापू हमें क्षमा करना 
हे बापू हमें क्षमा करना 
हम भूल गए पन्द्रह अगस्त |
तुमने तो इसे बुलंदी दी 
हो गया हमीं से अस्त -व्यस्त |

रंगे कोयले के रंगों में 
उजले -धुले वस्त्र खादी के ,
लाल किले से झूठे भाषण 
मुखिया पढ़ता आज़ादी के ,
महंगाई ,भ्रष्टाचार ,निकम्मे 
शासन से हौसले पस्त |

अब जागरूक जनता को भी 
नेता असत्य समझाते हैं ,
संसद में जाकर सोते हैं 
ये जन गण मन कब गाते हैं ,
हो गया देश यह हवनकुंड 
लेकिन दिल्ली है मस्त -मस्त |

हे राष्ट्रपिता क्या आज़ादी की 
यह तस्वीर तुम्हारी है ?
टू जी थ्री जी सब पचा गए 
अब अगले की तैयारी है |
उन वीर शहीदों के सपने 
सब मंसूबे हो गए ध्वस्त |

वैभव ,वीरों से भरे हुए हम 
इतना क्यों असहाय हुए ,
अब तो अपना है संविधान 
फिर इतना क्यों निरुपाय हुए 
सो गए पहरुए जनता के 
बस कागज पर लग रही गश्त |
चित्र -गूगल से साभार 

एक गीत -मोगरे का फूल जूड़े में

  चित्र साभार गूगल  एक गीत -मोगरे का फूल जूड़े में  मोगरे का फूल  जूड़े में  सजाती है.  नदी हँसकर  ज़िन्दगी का   गाती  है. धूप -छाँही  सफऱ में ...