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| चित्र साभार गूगल |
एक ग़ज़ल-आख़िरी फूल हैं मौसम के
सिर्फ़ मधुमास के मौसम में ही ये खिलते हैं
आख़िरी फूल हैं मौसम के चलो मिलते हैं
जागकर देखिए जलते हैं ये औरों के लिए
ये दिए दिन के उजाले में कहाँ जलते हैं
आसमानों के कई रंग हैं सूरज हम तो
एक ही रंग में पश्चिम की दिशा ढ़लते हैं
सिद्ध जो असली ज़माने को दुआ देते हैं
कुछ तमाशाई हैं जो पानियों पे चलते हैं
जयकृष्ण राय तुषार
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| चित्र साभार गूगल |

