![]() |
| चित्र साभार गूगल |
एक ग़ज़ल -रूप मौसम की तरह
आपका रूप लगे खिलते गुलाबों की तरह
मन की सुंदरता भी है अच्छी किताबों की तरह
ज़िन्दगी दरिया सी कश्ती भी है तूफ़ान भी है
अच्छे लोगों से मुलाक़ात है ख़्वाबों की तरह
चाँद सूरज तो नहीं आप भी और हम भी नहीं
देश को कुछ तो उजाला दें चिरागों की तरह
यह जगत माया है बस ब्रह्म सनातन सच है
हम इसी दुनिया में उलझे हैं हिसाबों की तरह
कवि /शायर जयकृष्ण राय तुषार
![]() |
| चित्र साभार गूगल |

.jpeg)