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| चित्र साभार गूगल |
एक पुरानी ग़ज़ल -
पत्रा में लग्न खूब थे
सूखे में कहीं बाढ़ में फसलें थी धान की
फिर भी अमीन लाये हैं नोटिस लगान की
पत्रा में लग्न खूब थे पंडित भी कम ने
फिर भी कुँवारी रह गयी बेटी किसान की
बच्चों की दौड़ कम हुई आँगन की मेड़ से
शहतीरें बाँट दी गईं गिरते मकान की
दिल भी दिए की लौ की तरह काँपने लगा
आमद कहीं न हो ये किसी मेहमान की
कैसे सुकूँ के गीत सुनाएंगी कोयलें
हर शाख पे निगाह है तीरो कमान की
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| चित्र साभार गूगल |
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| पात्रा /पंचांग चित्र साभार गूगल |



आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में शनिवार 29 अगस्त, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
ReplyDeleteआपका हृदय से आभार. सादर अभिवादन
Deleteहर शाख पे निगाह है तीरो कमान की
ReplyDelete- वाह!!
सुंदर गीत
ReplyDeleteसुंदर ग़ज़ल
ReplyDeleteसुंदर प्रस्तुति
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