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Sunday, 11 April 2021

एक प्रेम गीत -फूलों में ,घाटी में कोई बैठा रेगिस्तान में

 

चित्र -साभार गूगल 

एक प्रेम गीत- फूलों में ,घाटी में कोई बैठा रेगिस्तान में

फूलों में,
घाटी में, कोई
बैठा रेगिस्तान में ।
ढाई अक्षर
प्रेम का
किसने बोला मेरे कान में ।

अलबम में
अनगिन छवियाँ
पर कोई भाती है,
फूल से
उड़कर तितली
मेरे ऑंगन आती है,
कुछ तो
शेर मोहब्बत -
वाले होते हर दीवान में ।

मैसेन्जर को
खोल के कोई
कहता हाय हैलो ,
भींग रहा है
लोनावाला
चुपके से निकलो,
याद अजन्ता
और एलोरा की
आती सुनसान में ।

दैहिक प्यार
क्षणिक है
मन का प्यार अनूठा है,
क्षितिज कहाँ
है इन्द्रधनुष
का किस्सा झूठा है,
परिचित से
दूरी जाने क्यों
मन लगता अनजान में ।

कवि-जयकृष्ण राय तुषार
चित्र -साभार गूगल 


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