| श्री कृष्ण और माँ यशोदा |
एक गीत -माँ
किसी गीत के सुन्दर मुखड़े जैसी मेरी माँ थी
गंगा ,जमुना ,
पोथी,पत्रा
और न जाने क्या थी ?
किसी गीत के
सुन्दर मुखड़े
जैसी मेरी माँ थी |
रामचरित
मानस .गीता सी
तुलसी आँगन की ,
एक जादुई
परीकथा है
मेरे बचपन की ,
अश्रु बहे
या दर्द सभी का
मेरी वही दवा थी ।|
मन्दिर की
घंटी ,कपूर सी
दिया ओसारे का ,
मौसम
पढ़ती रही
उम्र भर गिरते पारे का ,
सूखे में
बारिश ,गर्मी में
शीतल मंद हवा थी |
पुरखों का
तर्पण ,पोतों का
व्याह रचाती थी ,
उत्सव ,कथा
व्याह में मंगल
गीत सुनाती थी ,
बेटी ,बहू
पराये ,अपने
सबके लिए दुआ थी |
वंशी ,घूँघरू
पायल बनकर
दिनभर बजती थी ,
घर का थी
श्रृंगार मगर
माँ कभी न सजती थी ,
ओरहन सुनती
निर्णय देती
माँ इक राजसभा थी |
नंगे पाँव
पहुँचती थी
माँ खेत -कियारी में ,
पान दान में
पान फेरती
धान बखारी में ,
चूल्हा -चक्की
सानी -पानी
जाने कहाँ -कहाँ थी |
कवि -जयकृष्ण राय तुषार
सभी चित्र -साभार गूगल
