Showing posts with label एक ग़ज़ल -हिन्दोस्ताँ का रंग. Show all posts
Showing posts with label एक ग़ज़ल -हिन्दोस्ताँ का रंग. Show all posts

Saturday, 14 May 2022

एक ग़ज़ल -हिन्दोस्ताँ का रंग

चित्र साभार गूगल 


एक ग़ज़ल  -भींगे  वदन  के साथ


भींगे वदन के साथ मुसाफ़िर सफ़र में था

उसकी नज़र झुकी थी वो सबकी नज़र में था


बारिश, हवाएं, बिजलियां सब छेड़ते रहे

खुशबू लिए ये फूल  सभी की ख़बर में था


ख़त भी लिखा तो मेरा ठिकाना गलत लिखा

वरना मैं डाकिए के मुताबिक शहर में था


दौलत तमाम, बेटे थे शोहरत भी कम न थी

तनहा तमाम उम्र वो बूढ़ा ही घर में था


साया, दातून, घोंसला सब लेके गिर गया

बस्ती बहुत उदास थी कुछ तो शज़र में था


संतूर का वो शिव था उसे अलविदा कहो

हिन्दोस्ताँ का रंग उसी के नज़र में था


चेहरे को सच बता दिया लेकिन तमाम रात

आईना हर दीवार पे दहशत में, डर में था


बुझता हुआ चराग वहीं देखता रहा

दुनिया के साथ मैं भी हवा के असर में था


जयकृष्ण राय तुषार

चित्र साभार गूगल

स्मृति शेष पंडित शिव कुमार sharma

एक गीत -जीता भारत देश हमारा जीत गया बंगाल

  नेताजी सुभाष चंद्र बोस  एक गीत -जीता भारत देश हमारा जीत गया बंगाल  गुरुदेव रविन्द्रनाथ ठाकुर  जीता भारत देश हमारा  जीत गया बंगाल. नरभक्षी ...