Showing posts with label एक गीत -कहीं तो होगा हरापन. Show all posts
Showing posts with label एक गीत -कहीं तो होगा हरापन. Show all posts

Thursday, 14 May 2020

एक गीत -कहीं तो होगा हरापन


गुलमोहर [चित्र -साभार गूगल ]

एक गीत -कहीं तो होगा हरापन 

छटपटाते 
प्यास से 
व्याकुल हिरन के प्रान |

और नदियों 
के किनारे 
शब्द भेदी बान |


जल रहे हैं 
वन ,नशीली 
आँधियों के दिन ,
हवा जूड़े
खोलकर के
ढूँढती है पिन ,


झील की 
लहरें अचंचल 
डूबता दिनमान |


निर्वसन 
हैं खेत ,
धानी दूब वाली मेड़ ,
चटख फूलों 
से भरे 
गुलमोहरों के पेड़ ,

बन्द आँखे 
मगर आहट 
सुन रहे हैं कान |


हँस रहीं हैं
मारिचिकाएँ
कर रहीं उपहास,
हर कदम
विभ्रम नहीं
बुझती पथिक की प्यास,

कहीं तो
होगा हरापन
और नखलिस्तान ।



धूल उड़ती 
देखती 
गोधूलि बेला ,शाम ,
माँ अकेले 
जप रही है 
कहीं सीताराम !

स्वप्न फिर 
आषाढ़ 
बनकर रोपते हैं धान |

कवि -जयकृष्ण राय तुषार 

चित्र साभार गूगल 

एक गीत -जीता भारत देश हमारा जीत गया बंगाल

  नेताजी सुभाष चंद्र बोस  एक गीत -जीता भारत देश हमारा जीत गया बंगाल  गुरुदेव रविन्द्रनाथ ठाकुर  जीता भारत देश हमारा  जीत गया बंगाल. नरभक्षी ...