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Wednesday, 15 August 2012

बापू तेरे सपनों वाली वह आज़ादी कहाँ गयी ?

चित्र -गूगल से साभार 
बापू तेरे सपनोंवाली वह आज़ादी कहाँ गयी ?
बापू तेरे सपनों वाली
वह आज़ादी कहाँ गयी |
तुम जिसको चरखे में 
बुनते थे वह खादी कहाँ गयी |

नेता ,मंत्री खुलेआम 
अब सिर्फ़ तिजोरी भरते हैं .
सत्यमेवजयते को 
हर दिन झूठा साबित करते हैं ,
राजनीति वह पहलेवाली 
सीधी -सादी कहाँ गयी |

ठेकेदार व्यवस्था वाले 
राजमार्ग सब टूटे हैं ,
जन को पूछे कहाँ सियासत 
करम हमारे फूटे हैं ,
और अधिक पाने में 
अपनी रोटी आधी कहाँ गयी |

राजा जितना गूंगा -बहरा 
उतने ही हरकारे हैं ,
बंजर धरती ,कर्ज किसानी 
हम कितने बेचारे हैं ,
रामराज के सपनों वाली 
वह शहजादी कहाँ गयी |

जो भी सूर्य उगाते हैं हम 
उसको राहु निगल जाता है ,
सत्ता पाकर धर्मराज भी 
अक्सर यहाँ फिसल जाता है ,
जो सबका सुख दुःख सुनती थी 
वह आबादी कहाँ गयी |

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