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| चित्र -गूगल से साभार |
बापू तेरे सपनों वाली
वह आज़ादी कहाँ गयी |
तुम जिसको चरखे में
बुनते थे वह खादी कहाँ गयी |
नेता ,मंत्री खुलेआम
अब सिर्फ़ तिजोरी भरते हैं .
सत्यमेवजयते को
हर दिन झूठा साबित करते हैं ,
राजनीति वह पहलेवाली
सीधी -सादी कहाँ गयी |
ठेकेदार व्यवस्था वाले
ठेकेदार व्यवस्था वाले
राजमार्ग सब टूटे हैं ,
जन को पूछे कहाँ सियासत
करम हमारे फूटे हैं ,
और अधिक पाने में
अपनी रोटी आधी कहाँ गयी |
राजा जितना गूंगा -बहरा
उतने ही हरकारे हैं ,
बंजर धरती ,कर्ज किसानी
हम कितने बेचारे हैं ,
रामराज के सपनों वाली
वह शहजादी कहाँ गयी |
जो भी सूर्य उगाते हैं हम
उसको राहु निगल जाता है ,
सत्ता पाकर धर्मराज भी
अक्सर यहाँ फिसल जाता है ,
जो सबका सुख दुःख सुनती थी
वह आबादी कहाँ गयी |
