तबीयत से यहां गंगा नहाकर देखिए साहब
यहां पर जो सुकूं है वो कहां है भव्य महलों में
ये संगम है यहां तम्बू लगाकर देखिये साहब
हथेली पर उतर आयेंगे ये संगम की लहरों से
परिन्दों को मोहब्बत से बुलाकर देखिए साहब
ये गंगा फिर बहेगी तोड़कर मजबूत चट्टानें
जो कचरा आपने फेंका हटाकर देखिये साहब
