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Sunday, 22 May 2022

एक गीत -कवि माहेश्वर तिवारी



गीतकवि माहेश्वर तिवारी अपनी पत्नी श्रीमती बाल सुंदरी तिवारी संग 


मुरादाबाद यात्रा के दौरान हिंदी के अप्रतिम गीतकार आदरणीय माहेश्वर तिवारी जी ने अपना गीत संग्रह हरसिंगार कोई तो हो भेंट किया. माहेश्वर जी जो लिखते हैँ वही मंच पर गुनगुनाते भी हैँ अर्थात गीत का स्तर नहीं गिरने देते. यह उन गीतकारों में हैँ जिन्होंने हिंदी नवगीत ही न हीं कविता के मंचों को भी फूहड़ होने से बचाया. भवानी प्रसाद मिश्र, गोपाल सिंह नेपाली, नीरज, रमानाथ अवस्थी, वीरेंद्र मिश्र, डॉ शम्भूनाथ सिंह, डॉ शिव बहादुर सिंह भदौरिया ठाकुर प्रसाद सिंह, उमा शंकर तिवारी, श्रीकृष्ण तिवारी बुद्धिनाथ मिश्र उमाकांत मालवीय कैलाश गौतम, बच्चन, शिव मंगल सिंह सुमन जैसे कवियों का सानिध्य माहेश्वर जी का रहा. माहेश्वर जी  यश भारती से सम्मानित कवि हैँ, माहेश्वर जी के गीत हरसिंगार, बेला और गुड़हल की मोहक सुगंध लिए पाठकों के दिल में उतरते जाते हैँ. माहेश्वर जी यायावर

गीत कवि रहे, जन्म बस्ती शिक्षा गोरखपुर, बनारस मध्य प्रदेश भ्रमण करते करते पीतल नगरी मुरादाबाद में बस गए.सादर 


एक गीत -श्री माहेश्वर तिवारी


सारे दिन पढ़ते अख़बार

बीत गया यह भी इतवार


गमलों में 

पड़ा नहीं पानी

पढ़ी नहीं गई

संत वानी


दिन गुजरा

बिलकुल बेकार

सारे दिन

पढ़ते अख़बार

पुंछी नहीं

पत्रों की गर्द

खिड़की -

दरवाज़े बेपर्द


कोशिश की है

कितनी बार

सारे दिन

पढ़ते अख़बार


मुन्ने का

तुतलाता गीत

अनसुना

गया बिलकुल बीत


कई बार

करके स्वीकार

सारे दिन

पढ़ते अख़बार

कवि /गीतकार माहेश्वर तिवारी

पुस्तक 


एक गीत -मोगरे का फूल जूड़े में

  चित्र साभार गूगल  एक गीत -मोगरे का फूल जूड़े में  मोगरे का फूल  जूड़े में  सजाती है.  नदी हँसकर  ज़िन्दगी का   गाती  है. धूप -छाँही  सफऱ में ...