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| तिरंगा |
आज़ादी के पचहत्तर वर्ष पूर्ण होने पर 13 अगस्त से 15 अगस्त हर घर में तिरंगा फहराना चाहिए.भारत सरकार की मंशा है. राष्ट्र के प्रति हमारा भी पावन कर्तव्य है. वन्देमातरम
एक देशगान -घर घर उड़े तिरंगा
आज़ादी का
वर्ष पचहत्तर
घर -घर उड़े तिरंगा.
इसके सम्मुख
कान्तिहीन है
इंद्रधनुष सतरंगा.
तेजस्वी हो
सूर्य गगन का
अँधेरा खो जाये,
सोने की
चिड़िया भारत
अब विश्व गुरु हो जाये,
बुद्ध, कृष्ण
की धरती भारत
रहे न झगड़ा, दंगा.
रामचरित की
भूमि यहीं है
इसमें रामकाथाएं,
यज्ञ, हवन की
आहुति इसमें
पढ़ती मंत्र दिशाएं
भारत माँ के
अधरों पर
बहती हैं यमुना, गंगा
कला, संस्कृति
वेद मनोहर
तुलसी की चौपाई,
अनुसूया
सीता, गीता संग
इसमें मीराबाई,
सब धर्मों में
राष्ट्र प्रेम हो
मन हो सबका चंगा.
बोली भाषा
अनगिन संस्कृति
अनगिन रूपों वाली,
संग -संग
रहते भील, गोरखा
गढ़वाली, संथाली,
जम्मू, काशी
केरल, पटना
कामाख्या, होशंगा.
देव, प्रकृति
नारी, ऋषियों की
होती इसमें पूजा,
सबकी चिंता
करने वाला
राष्ट्र न कोई दूजा,
वृद्ध जनों का
आदर बचपन
रहे न भूखा नंगा.
चन्दन, केसर
की खुशबू हो
वन में फूल खिले,
वीर शहीदों
की गाथा को
घर घर मान मिले
शौर्य हमारा
दावानल हो
दुश्मन बने पतंगा.
कवि -जयकृष्ण राय तुषार
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| महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू |

