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| चित्र साभार गूगल |
एक गीत -बारिश की फुहार में भींगे
बारिश की
फुहार में भींगे
फूलों वाला गीत कहाँ है?
झुर झुर झुर झुर
हवा, नीम के
नीचे बैठा मीत कहाँ है?
कीचड़ सने
पाँव हैं लेकिन
धानी सपने हरे धान के,
सूखे घाट
बनारस वाले
किस्से सुनते रहे पान के,
सड़कों पर
कोलाहल पसरा
काशी का संगीत कहाँ है?
कालिदास के
मेघदूत की
आँखों में भी पानी कम है,
कड़ी धूप में
उजले बादल
देख देख जंगल बेदम है,
टूटी रीलों वाले
कैसेट में
गाता जगजीत कहाँ है?
पाट नदी के
सूखे सूखे
टूटी नौका चाँद निहारे,
अंजुरी भर
जल ढूंढ़ रहे हैं
जंगल जंगल हिरन कुँवारे,
साँझ ओसारे
जलते दीपक
ढूंढ रहे मनमीत कहाँ है?
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| चित्र साभार गूगल |
कवि /गीतकार
जयकृष्ण राय तुषार
























