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| चित्र साभार गूगल |
एक गीत -मोगरे का फूल जूड़े में
मोगरे का फूल
जूड़े में
सजाती है.
नदी
हँसकर
ज़िन्दगी का गीत गाती है.
धूप -छाँही
सफऱ में
यह हाँफती भी है,
सर्द मौसम
निर्वसन
यह काँपती भी है.
घन तिमिर है
घाट पर
बस दीप बाती है.
कुछ महावर
कुछ हलद से
पाँव लहरों में,
झील में
दिखता कहाँ
दिनमान शहरों में,
भोर में
चिड़िया सुनहरी
कहाँ आती है.
थकी हिरनी
हुआ मद्धम
बांस वन का स्वर,
बर्फ़बारी में
पहाड़ी गीत
गाता घर,
अब कोई
ढ़िबरी कहाँ
रस्ता बताती है.
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| चित्र साभार गूगल |
कवि /गीतकार
जयकृष्ण राय तुषार























