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| चित्र साभार गूगल |
एक गीत -फिर से प्यारा मौसम होगा
फिर से प्यारा
मौसम होगा
फूलों से बतियाएंगे.
भींगे पंखों
वाले पंछी
पत्तों से टकराएंगे.
धान रोपते
खेतों में फिर
पायल छन छन बोलेगी,
ठंडी ठंडी पुरवा
फिर यादों की
खिड़की खोलेगी,
प्यासे पर्वत
झरनों का जल
पीकर गीत सुनाएंगे.
मेहंदी, मौसम
कजली की फिर
बातें होंगी गलियों में,
आने वाली खुशबू
छिपकर बैठी
होगी कलियों में,
मेघों जैसे
जुड़े खुलकर
दरपन से बतियाएंगे.
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| चित्र साभार गूगल |
कवि -जयकृष्ण राय तुषार





















