Sunday, 25 October 2026

एक गीत -शरद पूर्णिमा पर

 

शरद पूर्णिमा चित्र साभार गूगल 

ओ शरद की 

पूर्णिमा 

स्वागत तुम्हारा है.

आज का 

मौसम अलौकिक 

और प्यारा है.


खीर के 

सुंदर कटोरे 

छतों पर रखना,

ओ गगन की 

चाँदनी 

आकर इन्हें चखना,

आज 

निधिवन 

रास का सुंदर नज़ारा है.


माँ लक्ष्मी का 

जन्मदिन 

हम सब मनाएंगे,

आज बन 

गंधर्व हम 

भी गीत गाएंगे,

फूल, 

खुशबू 

हवन, गुंजित मंत्र प्यारा है.


स्वर्ग सा 

उल्लास 

फैला है दिशाओं में,

आज निखरा 

चन्द्रमा 

सोलह कलाओं में,

यह उजाला 

कुछ तुम्हारा 

कुछ हमारा है.

सागर मंथन माता लक्ष्मी का अवतरण 


Saturday, 3 October 2026

एक देशगान -स्मित माछर जैसे बेटों पर है गर्व तिरंगा को

 

सीता राम 

कैप्टन स्मित माछर 

राष्ट्र को समर्पित गीत 

एक देशगान -सरयू तट पर राम लिखो 


सुबह -सुबह 

जब सूरज निकले 

सरयू तट पर राम लिखो.

जब भी दुनिया पर 

संकट हो 

भारत माँ का नाम लिखो.


स्मित माछर 

जैसे बेटों पर है 

गर्व तिरंगा को,

यहीं भीष्म सा 

बेटा मिलता 

मुक्तिदायिनी गंगा को,

गीता पढ़कर 

वंशी सुनती 

वृंदावन की शाम लिखो.


काशी के घाटों पर 

हर हर महादेव 

का नाद रहे,

पूरी दुनिया में 

वेदों का 

मंगलमय अनुवाद रहे,

पंचवटी को 

पावन करके 

फिर से चारो धाम लिखो.


चंदन वन में 

नाग विषैले 

छद्म वेश में घूम रहे,

विषकन्याओं के 

अधरों को 

कुछ पाखंडी चूम रहे,

गालीबाजों का 

आतंकी 

गद्दारों में नाम लिखो.


फूलों की घाटी में 

किसने बोया 

बेर बबूलों को,

राष्ट्र धर्म से 

फिर सुधारना होगा 

अपनी भूलों को,

भारत माँ के 

चरण कमल में 

अनगिन बार प्रणाम लिखो 

सरयू माता 

फूलों की घाटी 

Tuesday, 8 September 2026

एक पुराना लोकभाषा गीत -चुहुल ननद भौजाई कै

 

चित्र साभार गूगल 

एक पुराना लोकभाषा गीत 


लोकसंस्कृति, गाँव की रौनक़, उत्सवजीविता को, लोकपरम्परा को याद करती लोकभाषा कविता.सादर अभिवादन सहित


एक लोकभाषा गीत -मेल -जोल बैठकी नदारद 


काटै दौड़इ साँझ, भोरहरी

बिना फूल कै डाल बा.

चिरई चुनमुन गायब होय गैं

बिना कमल के ताल बा.


मेल -जोल बैठकी नदारद

बिरहा, कजरी, कव्वाली

हलुवा, पूरी के प्रसाद से

वंचित डिह, माता काली

घर में टी वी चैनल, बाहर 

बिग बजार औ मॉल बा


पान दान हुक्का संग छूटल

किस्सागोई माई कै

आभासी दुनिया में गुम हौ

चुहुल ननद भौजाई कै

कइसे मरल आँख कै पानी

ई सौ टका सवाल बा.


भजन न जोगी सारंगी कै

कुटिया, मठ सन्नाटा हौ 

पक्की सड़क बनल हौ लेकिन

कदम, कदम पर काँटा हौ

नेता डेंगूँ कहैँ धरम के

कवन देश कै हाल बा.


खट्टी, मीठी जामुन कै रंग

याद न महुवा बारी कै

पीली पीली सरसों भूलल

भूलल धान कियारी कै 

पइसा बढ़ल गरीबी गायब

पर उत्सव कंगाल बा.


बुलबुल, मैना, पपिहा, कोयल

लरिका ना पहिचानै ल

बाप -मतारी छोड़िके

कउनो रिश्ता ना ई जानै ल 

कहाँ ओसारे, कहाँ दुवारे

गैंता और कुदाल बा.


जयकृष्ण राय तुषार

चित्र साभार गूगल 


चित्र साभार गूगल

Wednesday, 26 August 2026

एक पुरानी ग़ज़ल -पत्रा में लग्न खूब थे

 

चित्र साभार गूगल 

एक पुरानी ग़ज़ल -

पत्रा में लग्न खूब थे 


सूखे में कहीं बाढ़ में फसलें थी धान की 

फिर भी अमीन लाये हैं नोटिस लगान की 


पत्रा में लग्न खूब थे पंडित भी कम ने 

फिर भी कुँवारी रह गयी बेटी किसान की 


बच्चों की दौड़ कम हुई आँगन की मेड़ से 

शहतीरें बाँट दी गईं गिरते मकान की 


दिल भी दिए की लौ की तरह काँपने लगा 

आमद कहीं न हो ये किसी मेहमान की 


कैसे सुकूँ के गीत सुनाएंगी कोयलें 

हर शाख पे निगाह है तीरो कमान की 

चित्र साभार गूगल 

पात्रा /पंचांग चित्र साभार गूगल 


Sunday, 16 August 2026

एक ग़ज़ल -चाँद की महफ़िल में

 

चित्र साभार गूगल 

चाँद की महफ़िल में हर दिन इतराता है 

प्यासा बादल ही दरिया तक आता है 


गुलशन में ही फूल, तितलियाँ मत ढूंढो 

मौसम जूड़े में भी फूल खिलाता है 


सूरदास को दरबारों से क्या लेना 

वह तो वृंदावन को गीत सुनाता है 


रिश्ते नाते गाँव -शहर में भूल गए 

गाँव का मौसम अब भी रोज बुलाता है 


वनवासी प्रभु को छोड़ा इंसानों ने 

वानर कुल मुश्किल में साथ निभाता है 


खिड़की से परदा थोड़ा सा खिसका है 

कोई होने का अहसास दिलाता है 


फूल पे बैठी तितली भौँरे चले गए 

भींगे मौसम से पत्थर बतियाता है 

महाकवि सूरदास चित्र साभार गूगल 

चित्र साभार गूगल 


Friday, 14 August 2026

आज़ादी की पूर्व संध्या पर एक देशगान -आज़ादी की इस मशाल को

 

झाँसी की रानी 

भारत माता 


आज़ादी की पूर्व संध्या पर एक पुराना देशगान 


जय-जय प्यारे देश हमारे

जय-जय हिन्दुस्तान।

आजादी की इस मशाल को

छू न सके तूफान।


पूरब से पश्चिम तक

तेरी गौरव गाथा है,

दक्षिण में सागर

उत्तर में सागरमाथा है,

तेरे कण-कण में लिक्खा है

बापू का बलिदान।


तुझमें सतलज कावेरी

गंगा का पानी है,

तुझमें नानक तुलसी और

मीरा की बानी है,

तेरी मिट्टी की खुशबू में

हैं दादू , रसखान।


तक्षशिला नालंदा

तेरी पुराकथाएं हैं,

यहां बाइबिल गुरुग्रन्थ

और वेदऋचाएं हैं,

हम भटकें तो राह दिखाते

हैं गीता-कुरआन।


हँसता है मधुमास

यहां पर सावन गाता है,

रंग-बिरंगे धर्मों का

यह सुन्दर छाता है,

हर मौसम में यहां

गूँजती है वंशी की तान।


हम दुनिया की राहों में

बस फूल सजाते हैं,

सत्य अहिंसा विश्व शांति के

दीप जलाते हैं,

वीर तपस्वी बलिदानी

बच्चों की तू है खान।


कवि /गीतकार 

जयकृष्ण राय तुषार

भारत की संस्कृति 

सभी चित्र साभार गूगल 

Friday, 31 July 2026

एक गीत -मोगरे का फूल जूड़े में

 

चित्र साभार गूगल 

एक गीत -मोगरे का फूल जूड़े में 


मोगरे का फूल 

जूड़े में 

सजाती है. 

नदी हँसकर 

ज़िन्दगी का 

 गीत गाती  है.


धूप -छाँही 

सफऱ में 

यह हाँफती भी है,

सर्द मौसम 

निर्वसन 

यह काँपती भी है.

घन तिमिर है 

घाट पर 

बस दीप बाती है.


कुछ महावर 

कुछ हलद से 

पाँव लहरों में,

झील में 

दिखता कहाँ 

दिनमान शहरों में,

भोर में 

चिड़िया सुनहरी 

कहाँ आती है.


थकी हिरनी 

हुआ मद्धम 

बांस वन का स्वर,

बर्फ़बारी में 

पहाड़ी गीत 

गाता घर,

अब कोई 

ढ़िबरी कहाँ 

रस्ता बताती है.


चित्र साभार गूगल 


कवि /गीतकार 

जयकृष्ण राय तुषार 

Sunday, 26 July 2026

एक गीत -नदी के इस पार मैं हूँ

 

चित्र साभार गूगल 

एक गीत -नदी के इस पार मैं हूँ 


नदी के इस पार 

मैं हूँ 

उस तरफ सब फूल हैं.

घना कोहरा 

नाव माझी 

बात में मशगूल हैं.


गन्ध पुष्पों के 

बिना अब 

देवता पर क्या चढ़े?

शोक में 

डूबा हुआ मन 

मंत्र वैदिक क्या पढ़े?

तैर भी 

सकता नहीं 

गहरे भंवर के कूल हैं.



रेत के टीले 

इधर हैं 

उधर चंदन वन घना है,

आरती के 

स्वर उधर हैं 

इधर मौसम अनमना है,

राम पथ में 

पाँव नंगे 

कांच बिखरे शूल हैं.

चित्र साभार गूगल श्रीराम जी 


एक गीत -कत्थक की शामें

 

चित्र साभार गूगल 

एक सामयिक गीत -कत्थक की शामें अब सुनती हैं बैले 


चन्दन वन 

माटी में 

काकरोच फैले.

आँखों में 

स्वप्न सभी 

हो गए विषैले.


विकसित है 

भारत पर 

संस्कार हीन हुआ,

मीठा जल 

झरनों का कैसे 

नमकीन हुआ,

गाँव से 

नगर आकर 

हो गए बनैले.


आगजनी,

हिंसा है 

पूनम की रातों में,

सम्मोहन 

लुप्त हुआ 

मौसम की बातों में,

मीठे 

झरबेरों के 

स्वाद हैं कसैले.


टूटते कुटुंबों 

के दरपन 

भी टूट गए,

संग शुष्क 

नदियों से 

हिरनों के छूट गए,

कत्थक की 

शामें अब 

देख रहीं बैले.

चित्र साभार गूगल 


Tuesday, 23 June 2026

एक गीत -बारिश की फुहार में भींगे

 

चित्र साभार गूगल 

एक गीत -बारिश की फुहार में भींगे 


बारिश की 

फुहार में भींगे 

फूलों वाला गीत कहाँ है?

झुर झुर झुर झुर 

हवा, नीम के 

नीचे बैठा मीत कहाँ है?


कीचड़ सने 

पाँव हैं लेकिन 

धानी सपने हरे धान के,

सूखे घाट 

बनारस वाले 

किस्से सुनते रहे पान के,

सड़कों पर 

कोलाहल पसरा 

काशी का संगीत कहाँ है?


कालिदास के 

मेघदूत की 

आँखों में भी पानी कम है,

कड़ी धूप में 

उजले बादल 

देख देख जंगल बेदम है,

टूटी रीलों वाले 

कैसेट में 

गाता जगजीत कहाँ है?


पाट नदी के 

सूखे सूखे 

टूटी नौका चाँद निहारे,

अंजुरी भर 

जल ढूंढ़ रहे हैं 

जंगल जंगल हिरन कुँवारे,

साँझ ओसारे 

जलते दीपक 

ढूंढ रहे मनमीत कहाँ है?


चित्र साभार गूगल 


कवि /गीतकार 

जयकृष्ण राय तुषार 

एक गीत -शरद पूर्णिमा पर

  शरद पूर्णिमा चित्र साभार गूगल  ओ शरद की  पूर्णिमा  स्वागत तुम्हारा है. आज का  मौसम अलौकिक  और प्यारा है. खीर के  सुंदर कटोरे  छतों पर रखना...