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| चित्र -गूगल से साभार |
आप सभी को होली की बधाई एवं शुभकामनाएँ
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| चित्र -गूगल से साभार |
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| चित्र -गूगल से साभार |
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| चित्र -गूगल से साभार |
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| भारत माता |
इस देश को शर्मसार करने वालों पर अब निर्णायक कार्रवाई होनी चाहिए चाहे वो नेता हों छात्र हों या किसी पार्टी के बदतमीज़ कार्यकर्ता कोई भी हों. राष्ट्र की गरिमा सर्वोपरि है. कुछ लोग लगातार विदेशों में जाकर भारत माँ की छवि धूमिल कर रहे हैं. अब कठोर क़ानून बनाना होगा.
जय हिन्द, वन्देमातरम
भारत माता के
मस्तक पर जो
हर दिन दाग लगाते हैं.
भारत की
संसद में
ऐसे गद्दार कहाँ से आते हैं.
भारत माता है
पराशक्ति
इसके त्रिनेत्र को मत खोलो,
सरहद के
अंदर रहना है तो
भारत माँ की जय बोलो,
अब उनको
दण्डित करना है
जो दुश्मन राग सुनाते हैं.
गोरी, गजनी
तैमूरों के
मत हाथों के हथियार बनो.
आज़ाद,
विवेकानंद बनो
ओ साथी मत गद्दार बनो,
जो मंत्र
शकुनियों से लेते
वो कुरुक्षेत्र बन जाते हैं.
यह धन्यभूमि
भारत माता
सौ सौ अपराध क्षमा करती,
यह ज्ञान, दान
भोजन देकर
शरणागत की झोली भरती,
इस भारत माता
के कमल पुष्प
देवों को रोज रिझाते हैं.
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| स्वामी विवेकानंद जी |
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| चित्र साभार गूगल |
एक गीत -आसपास फूलों की गंध को सजाएँ
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| चित्र साभार गूगल |
प्रयागराज एक सांस्कृतिक शहर -लेखक गुंजन अग्रवाल
आज यह पुस्तक व्हीलर की दुकान
पुस्तक का नाम -प्रयागराज एक जीवंत सांस्कृतिक नगर
लेखक -गुंजन अग्रवाल
प्रकाशक -डायमंड बुक्स,नई दिल्ली
मूल्य 400
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| चित्र साभार गूगल |
एक लोकभाषा गीत-
प्रेम क रंग निराला हउवै
सिर्फ़ एक दिन प्रेम दिवस हौ
बाकी मुँह पर ताला हउवै
ई बाजारू प्रेम दिवस हौ
प्रेम क रंग निराला हउवै
सबसे बड़का प्रेम देश की
सीमा पर कुर्बानी हउवै
प्रेम क सबसे बड़ा समुंदर
वृन्दावन कै पानी हउवै
प्रेम भक्ति कै चरम बिंदु हौ
तुलसी कै चौपाई हउवै
सूरदास,हरिदास,सुदामा
ई तौ मीराबाई हउवै
प्रेम क मन हौ गंगा जइसन
प्रेम क देह शिवाला हउवै
प्रेम मतारी कै दुलार हौ
बाबू कै अनुशासन हउवै
ई भौजी कै हँसी-ठिठोली
गुरु क शिक्षा,भाषन हउवै
बेटी कै सौभाग्य प्रेम हौ
बहिन क रक्षाबन्धन हउवै
सप्तपदी कै कसम प्रेम हौ
हल्दी,सेन्हुर,चन्दन हउवै
आज प्रेम में रंग कहाँ हौ
एकर बस मुँह काला हउवै
प्रेम न माटी कै रंग देखै
प्रेम नदी कै धारा हउवै
ई पर्वत घाटी फूलन कै
खुशबू कै फ़व्वारा हउवै
जइसे सजै होंठ पर वंशी
वइसे अनहद नाद प्रेम हौ
एके ढूँढा नहीं देह में
मन से ही संवाद प्रेम हौ
प्रेम न राजा -रंक में ढूंढा
ई गोकुल कै ग्वाला हउवै
कवि -जयकृष्ण राय तुषार
| चित्र साभार गूगल |
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| चित्र साभार गूगल |
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| चित्र साभार गूगल |
सड़कें अच्छी अच्छा मौसम
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| चित्र साभार गूगल |
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| चित्र साभार गूगल |
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| चित्र साभार गूगल |
एक ताज़ा गीत -कहाँ हैं वो खिलखिलाते गाँव
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| चित्र साभार गूगल |
एक गीत -याद करो फिर क़सम राम की
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| प्रभु श्रीराम वनवास में |
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| चित्र साभार गूगल तिरंगा |
एक देशगान.
संविधान का गर्व तिरंगा
संविधान का गर्व तिरंगा
भारत का अभिमान है.
एक -एक धागे में इसके
वीरों का बलिदान है.
शस्य श्यामला धरती
इसकी मिट्टी प्यारी है,
विविध रंग के फूलों की
यह अनुपम क्यारी है,
मानस की चौपाई सुन्दर
सामवेद का गान है.
सब तीर्थ यहाँ पर मिलते हैं
इसमें गंगा का पानी है,
ऋषियों, मुनियों का तप इसमें
यह मिट्टी ही वरदानी है,
सरहद के रक्षक सैनिक हैं
अन्नदाता यहाँ किसान है.
बहु संस्कृतियों का संगम यह
इसका हर रंग रिझाता है,
यहाँ लोकरंग का जादू है
हर मौसम गीत सुनाता है,
इसकी महिमा लिखना मुश्किल
यह भारत भूमि महान है.
चंदन वन, केसर के संग संग
यह महाकाल की ज्वाला है
यह सती, रुक्मिणी, सीता है
यह गार्गी और आपाला है,
यह शास्वत और सनातन है
यह ईश्वर का वरदान है.
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| नेताजी सुभाष चंद्र बोस |
गीत कवि
जयकृष्ण राय तुषार
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| चित्र साभार गूगल |
एक नवगीत -जेब कटी फागुन की
जेब फटी
फागुन की
झर गए ग़ुलाल.
फूलों में
गंध नहीं
मौसम कंगाल.
चैता के
गीत कहाँ
शहरों के हिस्से,
वक़्त की
किताबों में
टेसू के किस्से,
स्मृतियों में
मृदंग
बजते करताल.
रफू किए
चुनरी में
वासंती खेत में,
हिरण
झुण्ड प्यासा है
नदियों की रेत में
मौसम की
आँखों में
टूटा है बाल.
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| चित्र साभार गूगल |
चित्र -गूगल से साभार आप सभी को होली की बधाई एवं शुभकामनाएँ एक गीत -होली आम कुतरते हुए सुए से मैना कहे मुंडेर की | अबकी होली में ले आ...