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| गंगा मैया |
एक ग़ज़ल -नए घर में
नए घर में पुराने एक दो आले तो रहने दो
वहीं से दीप बनकर माँ हमेशा रोशनी देगी
ये सूखी घास अपने लॉन की काटो न तुम भाई
पिता की याद आएगी तो ये फिर से नमी देगी
फ़रक बेटे औ बेटी में है बस महसूस करने का
वो तुमको रोशनी देगा ये तुमको चाँदनी देगी
ये माँ से भी अधिक उजली इसे मलबा न होने दो
ये गंगा है यही दुनिया को फिर से ज़िन्दगी देगी
जयकृष्ण राय तुषार
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| चित्र साभार गूगल |
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