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| चित्र -साभार गूगल |
एक गीत -स्वर्णमृग की लालसा
स्वर्ण मृग की
लालसा
मत पालना हे राम !
दोष
मढ़ना अब नहीं
यह जानकी के नाम |
आज भी
मारीच ,रावण
घूमते वन -वन ,
पंचवटियों
में लगाये
माथ पर चन्दन ,
सभ्यता
को नष्ट करना
रहा इनका काम |
लक्ष्मण रेखा
विफल
सौमित्र मत जाना ,
शत्रु का
तो काम है
हर तरफ़ उलझाना ,
चूक मत करना
सुबह हो ,
दिवस हो या शाम |
