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Saturday, 7 December 2019

एक गीत -स्वर्णमृग की लालसा


चित्र -साभार गूगल 

एक गीत -स्वर्णमृग की लालसा 

स्वर्ण मृग की 
लालसा 
मत पालना हे राम !
दोष 
मढ़ना अब नहीं 
यह जानकी के नाम |

आज भी 
मारीच ,रावण 
घूमते वन -वन ,
पंचवटियों 
में लगाये 
माथ पर चन्दन ,
सभ्यता 
को नष्ट करना 
रहा इनका काम |

लक्ष्मण रेखा 
विफल 
सौमित्र मत जाना ,
शत्रु का 
तो काम है 
हर तरफ़ उलझाना ,
चूक मत करना 
सुबह हो ,
दिवस हो या शाम |

एक गीत -मोगरे का फूल जूड़े में

  चित्र साभार गूगल  एक गीत -मोगरे का फूल जूड़े में  मोगरे का फूल  जूड़े में  सजाती है.  नदी हँसकर  ज़िन्दगी का   गाती  है. धूप -छाँही  सफऱ में ...