एक सियासी ग़ज़ल मौजूदा स्थिति पर
मुल्क को मुल्क बनाते हैं बस इन्सान मियां
बम औ बंदूक से दुनिया है परेशान मियां
नाम हमदर्दी का साज़िश है बड़े लोगों की
बन्द बोतल से निकल आये हैं शैतान मियां
औरतों,बच्चों को क़ातिल के हवाले करके
अपने ही मुल्क से धोखा किये अफ़गान मियां
ख़्वाब कश्मीर का अब देखना छोड़ो प्यारे
सन इकहत्तर को नहीं भूलना इमरान मियां
हम अहिंसा के पुजारी है मगर याद रहे
है निहत्था नहीं कोई मेरा भगवान मियां

