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| चित्र -गूगल से साभार |
एक गीत -शहरों के नामपट्ट बदले
चाल -चलन
जैसे थे वैसे
शहरों के नामपट्ट बदले |
भेदभाव
बाँट रही सुबहें
कोशिश हो सूर्य नया निकले |
दमघोंटू
शासन है
जनता के हिस्से ,
विज्ञापनजीवी
अख़बारों के
किस्से ,
हैं कोयला
खदानों के
सब दावे उजले |
मीरा के
होठों पर
जहर भरी प्याली ,
है औरत के
हिस्से का
आसमान खाली ,
बस आंकड़े
तरक्की के
कागज पर उछले |
लूटमार
हत्याएँ
घपले -घोटाले ,
हम केवल
मतदाता
वोट गए डाले ,
हैं गंगाजल
भरे हुए
पात्र सभी गँदले |
आंधी का
मौसम है
फूलों में गंध कहाँ ,
कबिरा की
बानी में
अब वैसा छन्द कहाँ ,
शहर
हुए चांदी के

