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| महान जननायक -अन्ना हजारे |
ईमान हुए वो
बन्दी कारागारों में |
भ्रष्टाचारी
पूजनीय हैं
पूजनीय हैं
राजा के दरबारों में |
अर्धरात्रि को
मिली हमें ये आज़ादी
कब भोर हुई ,
राजघाट पर
राजव्यवस्था कैसे
आदमखोर हुई ,
एक नहीं अब
कई शकुनि हैं
सत्ता के गलियारों में |
कई शकुनि हैं
सत्ता के गलियारों में |
तानाशाही
झुक जाती जब
जनता आगे आती है ,
हथकड़ियों
जेलों से कोई
क्रांति कहाँ रुक पाती है ,
कहाँ अहिंसा से
लड़ने की
लड़ने की
हिम्मत है तलवारों में |
फिर तिलस्म
तोड़ेगा कोई
हातिमताई आयेगा ,
अन्ना का
यह अनशन निश्चित
भ्रष्टाचार मिटाएगा ,
एक दिया भी
जला अगर तो
भय होगा अंधियारों में |
[यह कविता महान जननायक अन्ना हजारे को समर्पित ]
[यह कविता महान जननायक अन्ना हजारे को समर्पित ]
