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Wednesday, 17 August 2011

एक कविता -राजघाट पर राजव्यवस्था

महान जननायक -अन्ना हजारे 
राजघाट पर राजव्यवस्था
जिनका है 
ईमान हुए वो 
बन्दी कारागारों में | 
भ्रष्टाचारी 
पूजनीय हैं   
राजा के दरबारों  में |

अर्धरात्रि को 
मिली हमें ये आज़ादी 
कब भोर हुई ,
राजघाट पर 
राजव्यवस्था कैसे 
आदमखोर हुई ,
एक नहीं अब 
कई शकुनि हैं 
सत्ता के गलियारों में |

तानाशाही 
झुक जाती जब 
जनता आगे आती है ,
हथकड़ियों 
जेलों से कोई 
क्रांति कहाँ रुक पाती है ,
कहाँ अहिंसा से 
लड़ने की 
हिम्मत है तलवारों में |

फिर तिलस्म 
तोड़ेगा कोई 
हातिमताई आयेगा ,
अन्ना का 
यह अनशन निश्चित 
भ्रष्टाचार मिटाएगा ,
एक दिया भी 
जला अगर तो 
भय होगा अंधियारों में |
[यह कविता महान जननायक अन्ना हजारे को समर्पित ]

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