Wednesday, 26 August 2026

एक पुरानी ग़ज़ल -पत्रा में लग्न खूब थे

 

चित्र साभार गूगल 

एक पुरानी ग़ज़ल -

पत्रा में लग्न खूब थे 


सूखे में कहीं बाढ़ में फसलें थी धान की 

फिर भी अमीन लाये हैं नोटिस लगान की 


पत्रा में लग्न खूब थे पंडित भी कम ने 

फिर भी कुँवारी रह गयी बेटी किसान की 


बच्चों की दौड़ कम हुई आँगन की मेड़ से 

शहतीरें बाँट दी गईं गिरते मकान की 


दिल भी दिए की लौ की तरह काँपने लगा 

आमद कहीं न हो ये किसी मेहमान की 


कैसे सुकूँ के गीत सुनाएंगी कोयलें 

हर शाख पे निगाह है तीरो कमान की 

चित्र साभार गूगल 

पात्रा /पंचांग चित्र साभार गूगल 


Sunday, 16 August 2026

एक ग़ज़ल -चाँद की महफ़िल में

 

चित्र साभार गूगल 

चाँद की महफ़िल में हर दिन इतराता है 

प्यासा बादल ही दरिया तक आता है 


गुलशन में ही फूल, तितलियाँ मत ढूंढो 

मौसम जूड़े में भी फूल खिलाता है 


सूरदास को दरबारों से क्या लेना 

वह तो वृंदावन को गीत सुनाता है 


रिश्ते नाते गाँव -शहर में भूल गए 

गाँव का मौसम अब भी रोज बुलाता है 


वनवासी प्रभु को छोड़ा इंसानों ने 

वानर कुल मुश्किल में साथ निभाता है 


खिड़की से परदा थोड़ा सा खिसका है 

कोई होने का अहसास दिलाता है 


फूल पे बैठी तितली भौँरे चले गए 

भींगे मौसम से पत्थर बतियाता है 

महाकवि सूरदास चित्र साभार गूगल 

चित्र साभार गूगल 


Friday, 14 August 2026

आज़ादी की पूर्व संध्या पर एक देशगान -आज़ादी की इस मशाल को

 

झाँसी की रानी 

भारत माता 


आज़ादी की पूर्व संध्या पर एक पुराना देशगान 


जय-जय प्यारे देश हमारे

जय-जय हिन्दुस्तान।

आजादी की इस मशाल को

छू न सके तूफान।


पूरब से पश्चिम तक

तेरी गौरव गाथा है,

दक्षिण में सागर

उत्तर में सागरमाथा है,

तेरे कण-कण में लिक्खा है

बापू का बलिदान।


तुझमें सतलज कावेरी

गंगा का पानी है,

तुझमें नानक तुलसी और

मीरा की बानी है,

तेरी मिट्टी की खुशबू में

हैं दादू , रसखान।


तक्षशिला नालंदा

तेरी पुराकथाएं हैं,

यहां बाइबिल गुरुग्रन्थ

और वेदऋचाएं हैं,

हम भटकें तो राह दिखाते

हैं गीता-कुरआन।


हँसता है मधुमास

यहां पर सावन गाता है,

रंग-बिरंगे धर्मों का

यह सुन्दर छाता है,

हर मौसम में यहां

गूँजती है वंशी की तान।


हम दुनिया की राहों में

बस फूल सजाते हैं,

सत्य अहिंसा विश्व शांति के

दीप जलाते हैं,

वीर तपस्वी बलिदानी

बच्चों की तू है खान।


कवि /गीतकार 

जयकृष्ण राय तुषार

भारत की संस्कृति 

सभी चित्र साभार गूगल 

एक पुराना लोकभाषा गीत -चुहुल ननद भौजाई कै

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