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| चित्र साभार गूगल |
एक ताज़ा ग़ज़ल-
अच्छी चीजें सबको अच्छी लगती हैं
राग ,रंग,सुर,ताल बदलकर गाता है
खुशबू,बारिश,धूप का मौसम आता है
कोई दरिया खारा कोई मीठा है
प्यास बुझाता कोई प्यास बढ़ाता है
अच्छी चीजें सबको अच्छी लगती हैं
बच्चा भी खिड़की से चाँद दिखाता है
सबको शक था कौन है उसके कमरे में
अक्सर वह आईने से बतियाता है
तुलसी,ग़ालिब,मीर पढ़ो या खुसरो को
बाल्मीकि ही छन्दों का उद्गाता है
जब भी तन्हा दिल में ज्वार उमड़ता है
सागर भी साहिल से मिलने आता है
कवि -जयकृष्ण राय तुषार
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| चित्र साभार गूगल |
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