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Tuesday, 4 January 2022

एक ग़ज़ल-चटख मौसम,किताबें,फूल

चित्र साभार गूगल


एक ग़ज़ल-

चटख मौसम,किताबें,फूल 


चटख मौसम,किताबें,फूल,कुछ किस्सा,कहानी है

मोहब्बत भी किसी बहते हुए दरिया का पानी है


नहीं सुनती ,नहीं कुछ बोलती ये चाँदनी गूँगी

मगर जूड़े में बैठी गूँथकर ये रात रानी है


सफ़र में थक के मैं पीपल के नीचे लेट जाता हूँ

दिए कि लौ में अब भी गाँव की संध्या सुहानी है


ये संगम है यहाँ रेती,हवन,नावें,परिंदे हैं

कमण्डल में कहीं गंगा,कहीं यमुना का पानी है


भले गोमुख से निकली है मगर देवों की थाती है

भगीरथ की तपस्या की ये गंगा माँ निशानी है


हमारे देश की मिट्टी में चन्दन और केसर है

कहीं अमरूद का मौसम कहीं लीची,खुबानी है


ज़रूरत है नहीं हमको शहर के ताज़महलों की

हमारे गाँव में उत्सव,तितलियाँ, मेड़ धानी है

कवि/शायर जयकृष्ण राय तुषार

चित्र साभार गूगल


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