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| चित्र साभार गूगल |
एक गीत-चाँदनी निहारेंगे
रंग चढ़े
मेहँदी के
मोम सी उँगलियाँ ।
धानों की
मेड़ों पर
मेघ औ बिजलियाँ ।
खुले हुए
जूड़े और
बच्चों के बस्ते,
हँसकर के
खिड़की से
सूर्य को नमस्ते,
फूलों का
माथ चूम
उड़ रहीं तितलियाँ ।
ढूँढ रहे
अर्थ सुबह
रातों के सपने,
रखकर
ताज़ा गुलाब
पत्र लिखा किसने,
आटे की
गोली सब
खा गयीं मछलियाँ ।
आहट
दीवाली की
किस्से रंगोली के,
दिन लौटे
दिए और
पान-फूल रोली के
चाँदनी
निहारेंगे छत
आँगन-गलियाँ ।

