Monday, 13 June 2022

एक ग़ज़ल -वो तो सूरज है

चित्र साभार गूगल 


एक ग़ज़ल -वो तो सूरज है


इन चरागों को तो आँचल से बुझा दे कोई

वो तो सूरज है जला देगा हवा दे कोई


मैं हिमालय हूँ तो चट्टानों से रिश्ता है मेरा

आम का फल नहीं पत्थर से गिरा दे कोई


माँ सी तस्वीर ये भारत की दिलों में सबके

चाहता है तू ये तस्वीर जला दे कोई


आग पी जाता हूँ सागर भी मैं सैलाब भी हूँ

सिरफ़िरा अब नहीं शोलों को हवा दे कोई


अब सियासत से सितारों को बचाना होगा

भींगते फूल सा मौसम को फ़ज़ा दे कोई


किसकी साजिश थी हरे वन को जला देने की

सूखते पेड़ को पत्ता अब हरा दे कोई


होंठ पर ठुमरी हो कव्वाली हो या प्रभु का भजन

शाम ख़ामोश है महफ़िल तो सजा दे कोई

जयकृष्ण राय तुषार


चित्र साभार गूगल 

Saturday, 11 June 2022

कुछ सामयिक दोहे

चित्र साभार गूगल 


कुछ सामयिक दोहे


कोई भी संगीत दे चित्रा या ख़य्याम

अब से पत्थरबाज़ हो कभी न कोई शाम


औरों से कहिए नहीं अपने घर की बात

अंधेरा कब चाहता हो पूनम की रात


मन्दिर -मस्जिद, चर्च में रहे शांति पैगाम

तुझमें है तेरा ख़ुदा  मुझमें मेरा राम


भारत माँ युग युग रहे तेरी कीर्ति अशेष

गंगाजल सा पुण्य दें ब्रह्मा, विष्णु, महेश 


भारत की रज भूमि में देवों का संसार

अर्जुन का गाण्डीव यह पोरस की तलवार


तार -तार मत कीजिए संविधान, क़ानून

लोगों तक मत भेजिए नफ़रत का मज़मून


पापी को मिलता कहाँ कभी पुण्य का धाम

अपराधी की छावनी बुलडोज़र के नाम 


बनना है तुलसी बनो, कबीरा औ रसखान

मुँह से मीठा बोलिए खाकर मगही पान


अतिथि प्रेम बंधुत्व की भारत एक मिसाल

इसके नभ में इंद्रधनु सागर सीप, प्रवाल


जिनके कर्मों से मिला सदा राष्ट्र को मान

सदियों तक उस राष्ट्र को रहता है अभिमान


प्रेम, शांति, सौहार्द से जीवित यह संसार

ज्यादा दिन चलती नहीं खिलजी की तलवार


हर दिन मौसम गर्म है गायब, तितली, फूल

बच्चे लावा हो गए कैसे ये स्कूल


दुनिया पहुँची  चाँद पर फिर भी हम हैरान

फिर भी कोई सच नहीं कहता हे भगवान


स्त्री माँ का रूप है उसको दो सम्मान

पूरी लंका जल गयी सिर्फ एक अपमान


गंगाजल में चन्द्रमा या यमुना में चाँद

दोनों में छवि एक है फिर कैसा उन्माद

जयकृष्ण राय तुषार

चित्र साभार गूगल 


Thursday, 9 June 2022

गंगा दशहरा -एक गीत

गंगा अवतरण 


आजगंगा दशहरा का पावन पर्व है


जगत को शीतलता हरीतिमा और जीवन देने वाली माँ गंगा का अवतरण दिवस है. माँ गंगा की निर्मलता और   आशीष समस्त भारतवासियों को मिलता रहे.हर हर गंगे


एक पुराना गीत


गोमुख से भू पर बहती

ओ गंगा तुझे नमन

जन -जन के मन मेंबहती

ओ गंगा तुझे नमन


मोक्षदायिनी है माँ गंगा

पापहारिणी है

शिव की सघन जटा से निकली

जगततारिणी है

दुर्गम पथ में आतप सहती

माँ गंगा तुझे नमन


गंगा तेरा जल अमृत है

सबको जीवन देता

तेरी महिमा से हर नाविक

अपनी नैया खेता

सबकी प्यास बुझाकर दहती

माँ गंगा तुझे नमन


तुम गायत्री, तुम सावित्री

तुम ही गीता हो

तुम हो वेद, पुराणों में माँ

तुम ही सीता हो

युग -युग राम कथा कहती

ओ गंगा तुझे नमन.

जयकृष्ण राय तुषार

चित्र साभार गूगल 


Sunday, 5 June 2022

एक देशगान -हर बच्चा गोरा -बादल हो

चित्र साभार गूगल 


एक देशगान -हर बच्चा गोरा -बादल हो(इतिहास प्रसिद्ध वीर योद्धा जिन्होंने खिलजी से राजा रत्नसेन को मुक्त कराया था )


फिर सरहद पर

हो शंखनाद

तुरही, नक्कारा, मादल हो.

इस भारत माँ 

की मिट्टी में

हर बच्चा गोरा -बादल हो.


हल्दी घाटी का

शौर्य देख

इसका हर कण -कण चंदन है,

यह स्वर्ग

यहाँ रामायण

गीता, सीता का अभिनन्दन है,

मुख में

ब्रह्माण्ड लिए कान्हा

मस्तक पर टीका, काजल हो.


निर्मित कर

फिर से नालंदा

संदीपनी आश्रम तक्षशिला,

चाणक्य

गढ़ो फिर चन्द्रगुप्त

घननंदों का साम्राज्य हिला,

केरल हो या कश्मीर

सभी की

झीलों में अब शतदल हो.


जो लक्षागृह तक

जाता हो

हे पाण्डुपुत्र वह मार्ग बदल,

जिसमें

शतरंज शकुनि का हो

उस राजमहल से तुरत निकल,

उस पर

अंकुश से वार करो

जो हाथी मद में पागल हो.

कवि -जयकृष्ण राय तुषार

चित्र साभार गूगल 


एक देशगान -तीन रंग से सजा तिरंगा

एक देशगान -तीन रंग से सजा तिरंगा तीन रंग से सजा तिरंगा हर घर में लहराए. आज़ादी का चन्दन वन यह कभी नहीं मुरझाए. जल थल नभ में रहे प्रतिष्ठित अप...